Himachal News: हिमाचल प्रदेश में किसानों के लिए एक बड़ी खबर है। अब उन लोगों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 2000 रुपये नहीं मिलेंगे, जो असल में खेती नहीं करते हैं। सरकार ने ऐसे ‘निष्क्रिय’ किसानों की पहचान के लिए एक बड़ा डिजिटल सर्वे शुरू कर दिया है। कृषि विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि जो लोग जमीन पर खेती करते नहीं पाए जाएंगे, उनकी किस्त तुरंत रोक दी जाएगी। इस कड़े फैसले ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो खेती छोड़े बैठे हैं और योजना का फायदा उठा रहे हैं।
हमीरपुर में चल रहा महा-सर्वे, आधे किसानों की जांच पूरी
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में डिजिटल एग्रीकल्चर सर्वे बहुत तेजी से चल रहा है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 3,14,139 किसानों का सर्वे हो चुका है। इनमें से 1,84,174 किसानों के डाटा को मंजूरी भी मिल गई है। जिले के 59.11 प्रतिशत किसानों ने अपना पंजीकरण करा लिया है। यह सर्वे अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार यह जानना चाहती है कि खेत में पसीना कौन बहा रहा है और कौन सिर्फ घर बैठे लाभ ले रहा है।
घर-घर जाकर हो रहा सत्यापन, नहीं बचेगी कोई चालाकी
कई किसान अभी भी इस डिजिटल पंजीकरण से बच रहे हैं या उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसे में कृषि विभाग ने पंचायत सहायकों और स्थानीय प्रतिनिधियों को खास निर्देश दिए हैं। अब ये अधिकारी घर-घर जाकर बाकी बचे किसानों को योजना से जोड़ेंगे। जिन किसानों ने खेती छोड़ दी है या उनकी जमीन खाली पड़ी है, सर्वे में उनका नाम आते ही उनकी किस्त हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी। सरकार का मकसद साफ है कि सिर्फ असली किसानों को ही सम्मान निधि का पैसा मिले।
पंजीकरण से चूके तो हाथ से जाएगा फायदा
कुछ किसान तकनीकी समस्याओं या जानकारी के अभाव में अपना नाम दर्ज नहीं करवा पाए हैं। कृषि विभाग ने ऐसे किसानों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता देने को कहा है। इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाए गए हैं:
- पंचायत स्तर पर पंजीकरण के लिए जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है।
- किसानों से बार-बार अपील की गई है कि वे अपनी खेती की सही जानकारी दर्ज करवाएं।
- पंचायत सहायकों को तकनीकी खामियां दूर कर जल्द पंजीकरण पूरा करने का लक्ष्य मिला है।
क्या कहते हैं कृषि विभाग के अधिकारी?
कृषि विभाग के उपनिदेशक दुर्गा दत्त शर्मा ने इस बड़े अभियान को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में केवल सक्रिय किसानों को ही किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने पंचायत सहायकों से कहा है कि वे हर घर तक पहुंचें। कोई भी योग्य किसान इस योजना से न छूटे और कोई भी फर्जी व्यक्ति इसका लाभ न उठा सके, यही इस डिजिटल सर्वे का असली मकसद है।


