Himachal News: हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में देश की पहली एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट) यूनिट स्थानीय लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गई है। प्लासड़ा औद्योगिक क्षेत्र में लगी इस फैक्ट्री से उठने वाली जहरीली बदबू ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। हवा और पानी में तेजी से फैल रहे इस खतरनाक प्रदूषण के खिलाफ हजारों लोगों ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस गंभीर मामले को लेकर अब पूरी तरह से हरकत में आ गए हैं।
सांस लेना हुआ दुश्वार, घरों में कैद हुए लोग
बीते कई महीनों से इस फैक्ट्री की बदबू ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हवा में फैले इस जहर के कारण बुजुर्गों और बच्चों की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। स्थानीय लोगों को भयानक सिरदर्द, चक्कर और आंखों में तेज जलन का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोगों ने सुबह की सैर और घरों से बाहर निकलना तक पूरी तरह बंद कर दिया है।
खड्ड में बहाया जा रहा जहर, ताक पर रखे नियम
इस यूनिट पर पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का गंभीर आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री का खतरनाक औद्योगिक कचरा और दूषित पानी सीधे पास की ‘चिकनी खड्ड’ में छोड़ा जा रहा है। इससे इलाके के प्राकृतिक जल स्रोत बुरी तरह प्रदूषित हो गए हैं। पर्यावरण संगठनों ने साफ कहा है कि यह यूनिट रिहायशी इलाके के बहुत करीब लगा दी गई है। शर्तों के साथ मिली पर्यावरण मंजूरी का यहां बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है।
प्रदूषण बोर्ड का नोटिस, आईआईटी रोपड़ से मांगी मदद
लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। उग्र प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से इस यूनिट को तुरंत बंद करने की सख्त मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री प्रबंधन को कड़ा नोटिस थमा दिया है। नालागढ़ के एसडीएम ने भी मौके पर जाकर इस उद्योग का गहन निरीक्षण किया है। इस भयानक प्रदूषण को तुरंत रोकने के लिए अब आईआईटी रोपड़ के विशेषज्ञों से सीधा संपर्क साधा गया है।


