भारतीय सेना का ‘मिशन 2047’, मुश्किल रास्तों पर टाटा ईवी से पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम

Kasauli News: भारतीय सेना ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बेहद अनोखा और बड़ा अभियान शुरू किया है। सेना ने हिमाचल प्रदेश के कसौली से लद्दाख के लेह तक ‘ग्रीन मिशन कैंपेन’ का आगाज किया है। इस मुहिम का मकसद प्रकृति को बचाना और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ अनिंद्य सेनगुप्ता ने इस खास यात्रा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पर्यावरण को समर्पित यह पूरी रोमांचक यात्रा कुल ग्यारह दिनों तक लगातार चलेगी।

इस अभियान के दौरान सेना की टीम हिमाचल प्रदेश के बेहद दुर्गम और कठिन इलाकों से गुजरेगी। कसौली से शुरू होकर लद्दाख के लेह तक कुल सोलह सौ तिरसठ किलोमीटर की लंबी दूरी तय की जाएगी। यह यात्रा आधुनिक सैन्य सोच का एक बड़ा उदाहरण है।

‘सूर्य ग्रीन हिमालयन ओडिसी’ को हरी झंडी

उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने इस महत्वपूर्ण यात्रा को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने ‘सूर्य ग्रीन हिमालयन ओडिसी’ को रवाना करते हुए सेना के इस प्रयास की सराहना की। यह देश के सुरक्षित भविष्य के लिए उठाया गया कदम है।

लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने बताया कि यह अभियान भारतीय सेना, गोल्डन की डिवीज़न और सूर्य कमांड का एक संयुक्त प्रयास है। यह यात्रा कसौली से शुरू होकर सुमदो, कुंजुम ला दर्रे, हानले और तंगत्से जैसे कठिन रास्तों से होते हुए अंत में लेह पहुंचेगी।

इस पूरे अभियान का एक मुख्य उद्देश्य टाटा के इलेक्ट्रिक वाहनों की वास्तविक क्षमताओं को परखना भी है। इतने ऊंचे और बेहद मुश्किल माहौल में इलेक्ट्रिक गाड़ियां कैसा परफॉर्म करती हैं, इसकी पूरी जांच इस लंबी यात्रा के दौरान वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी।

दिग्गज कंपनियों और मंत्रालयों का मिला साथ

भारतीय सेना की सूर्य कमांड ने इस बड़े अभियान के लिए देश के कई प्रमुख संगठनों से हाथ मिलाया है। इस यात्रा के आयोजन में टाटा मोटर्स, हिमाचल टूरिज्म, लेह टूरिज्म डिपार्टमेंट और भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पूरा सहयोग दिया है।

इस अभियान के पीछे भारतीय सेना का एक बहुत बड़ा और दूरदर्शी लक्ष्य छिपा हुआ है। सेना भारत सरकार के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। सेना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना देश की सुरक्षा करने के संकल्प पर आगे बढ़ रही है।

जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने बताया कि सेना ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने का फैसला किया है। इसके लिए वर्ष 2047 तक ‘जीरो-एमिशन’ यानी शून्य-उत्सर्जन वाली सेना बनने का एक बड़ा विजन और रोडमैप पूरी तरह तैयार किया गया है।

सेना की यह नई मुहिम प्रधानमंत्री के स्वच्छ और हरित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक अहम हिस्सा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के इस सफल परीक्षण से आने वाले समय में पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

Author: Sunita Gupta

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