केरल के सबसे ऊंचे ‘रमन’ हाथी के कमर्शियल इस्तेमाल पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, सरकार को कस्टडी लेने का दिया आदेश

Kerala News: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने पशु कल्याण के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक विशेष मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि बेजुबान जानवरों की भलाई सबसे ज्यादा जरूरी है।

शीर्ष अदालत ने केरल सरकार को एक कड़ा निर्देश जारी किया है। राज्य सरकार तुरंत ‘रमन’ नाम के प्रसिद्ध हाथी की कस्टडी अपने हाथों में ले। इसके बाद प्रशासन उसे किसी अच्छे और सुरक्षित रिहैबिलिटेशन सेंटर में ट्रांसफर करने की व्यवस्था करे।

रमन है राज्य का सबसे लंबा और लोकप्रिय हाथी

यह विशालकाय हाथी पूरे केरल राज्य का सबसे लंबा और बेहद लोकप्रिय जीव माना जाता है। शारीरिक बनावट के लिहाज से इसकी कुल ऊंचाई लगभग 10.53 फीट दर्ज की गई है। केरल के स्थानीय लोग इस हाथी को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की संयुक्त डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले की सुनवाई की है। बेंच ने रमन हाथी के लगातार हो रहे व्यावसायिक और कमर्शियल इस्तेमाल पर अपनी गहरी नाराजगी प्रकट की है।

धार्मिक रस्मों और जुलूसों में धड़ल्ले से हुआ इस्तेमाल

अदालत ने पाया कि न्यायिक रोक के बावजूद रमन को लगातार विभिन्न धार्मिक जुलूसों और भारी भीड़भाड़ वाली रस्मों में शामिल किया जा रहा था। बेंच ने कहा कि कोर्ट के सामने दिए गए अंडरटेकिंग के बावजूद ऐसा किया गया, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

सर्वोच्च अदालत ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर हम इस तरह के गंभीर उल्लंघनों को नजरअंदाज करेंगे, तो हम बेजुबान जानवरों के प्रति अपने कानूनी फर्ज को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित होंगे। अदालत ऐसे मामलों में मूकदर्शक नहीं रह सकती।

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दिए गए सुरक्षा निर्देश

शीर्ष कोर्ट ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि रमन की कस्टडी सरकार को सौंपने का यह नया आदेश केवल एक अस्थायी उपाय है। इस पूरे विवादित मामले पर अंतिम फैसला गहन कानूनी समीक्षा के बाद बाद में सुनाया जाएगा।

केरल सरकार पूरी तरह अपने सरकारी खर्च पर इस हाथी की अस्थायी देखभाल और भोजन की उचित व्यवस्था करेगी। प्रशासन इसके लिए वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत दिए गए कड़े सुरक्षा उपायों के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक आदेश भी जारी कर सकता है।

अंडरटेकिंग का उल्लंघन करने पर कृष्णनकुट्टी दोषी करार

यह नया न्यायिक आदेश जयकृष्ण मेनन द्वारा दायर की गई एक कोर्ट अवमानना याचिका पर आया है। याचिका में आरोप था कि रमन मुख्य रूप से ‘माता अमृतानंदमयी मठ’ का हाथी है, जिसे अस्थायी तौर पर कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था।

अदालत ने कृष्णनकुट्टी को कोर्ट के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन करने का दोषी पाया है। बेंच ने उस पर 2 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। आरोपी ने एक विवादित वसीयत और गिफ्ट डीड के आधार पर हाथी पर अपना हक जताया था।

थेचिकोट्टुकावु रामचंद्रन के नाम से भी मशहूर है यह गजराज

कृष्णनकुट्टी का दावा था कि वह पिछले 10-12 सालों से इस बेजुबान जीव की लगातार सेवा और देखभाल कर रहा था। हालांकि शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को अवमानना के सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है।

केरल का यह सबसे ऊंचा हाथी असल में ‘थेचिकोट्टुकावु रामचंद्रन’ के नाम से जाना जाता है। इसकी वर्तमान उम्र लगभग 60 साल हो चुकी है। स्थानीय भाषा में लोग इसे आदर से रमन बुलाते हैं और त्योहारों में इसकी मांग बहुत ज्यादा रहती है।

Author: Adv Anuradha Rajput

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