भारत में तेजी से घटती जन्म दर पर एलन मस्क ने जताया बड़ा विस्मय, क्या बूढ़ा हो रहा है हमारा देश?

Delhi News: दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क ने भारत में तेजी से गिरती फर्टिलिटी रेट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक रिपोर्ट साझा की है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश की जन्म दर अब आबादी स्थिर रखने के जरूरी स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी है।

एलन मस्क ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों के बीच जन्म दर कई साल पहले ही कम हो गई थी। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि देश की राजधानी दिल्ली की वर्तमान फर्टिलिटी रेट यूरोपीय देश फिनलैंड से भी कम रिकॉर्ड की गई है।

देश में कुल प्रजनन दर घटकर पहली बार हुई बेहद कम

ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर पहली बार घटकर मात्र 1.9 बच्चे प्रति महिला के स्तर पर आ गई है। यह आंकड़ा उस रिप्लेसमेंट लेवल से भी कम है जो लंबे समय तक किसी भी देश की कुल आबादी की बढ़त को लगातार बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले इस देश में यह बदलाव एक बहुत बड़े डेमोग्राफिक संकट का साफ संकेत है। इस गिरावट का मतलब है कि भारत अब तेजी से बढ़ती आबादी की पुरानी चिंता को पीछे छोड़ चुका है। अब देश के सामने बूढ़ी होती आबादी और छोटे होते परिवारों की नई चुनौती खड़ी है।

भविष्य में काम करने वाले युवाओं की कमी का मंडराया खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रति महिला कम से कम 2.1 बच्चों की प्रजनन दर जरूरी होती है। भारत की 1.9 की वर्तमान दर यह बताती है कि आने वाले कुछ दशकों में जनसंख्या तो बढ़ेगी, लेकिन जन्म दर न सुधरने पर अंत में इसमें बड़ी गिरावट आएगी।

देश की राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में यह बड़ा बदलाव अब साफ-साफ दिखने लगा है। वर्ष 1950 में भारत की आबादी सिर्फ 36 करोड़ थी जो अब बढ़कर लगभग 145 करोड़ हो चुकी है। यह पूरी दुनिया की कुल आबादी का करीब छठा हिस्सा माना जाता है।

दिल्ली और दक्षिणी राज्यों में यूरोपीय देशों जैसा खतरनाक ट्रेंड

आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में प्रजनन दर घटकर अब सिर्फ 1.2 बच्चे प्रति महिला रह गई है। इसके साथ ही दक्षिणी राज्य तमिलनाडु और पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में भी यह दर लगभग 1.3 तक पहुंच चुकी है। यह चिंताजनक ट्रेंड कुछ प्रमुख यूरोपीय देशों के बिल्कुल बराबर माना जाता है।

यह नया बदलाव सरकारी रणनीतियों में एक बहुत बड़े उलटफेर का संकेत देता है। साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से आबादी विस्फोट को लेकर देश को चेतावनी दी थी। हालांकि आज नीति-निर्माता इस बात से चिंतित हैं कि कहीं भारत भी पड़ोसी देश चीन जैसी स्थिति में न पहुंच जाए।

Author: Gaurav Malhotra

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