Punjab News: गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई और पंजाब पुलिस के अधिकारियों के बीच कथित संबंधों का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों के पास दर्ज एक बयान में दावा किया गया है कि एक पूर्व डीएसपी ने साबरमती जेल में बंद लारेंस बिश्नोई के जन्मदिन पर उसे तोहफे भिजवाए थे। यह खुलासा बिश्नोई गिरोह के सदस्य राजवीर सिंह उर्फ रवि राजगढ़ की पूछताछ के दौरान हुआ है।
आरोपों के मुताबिक, 11 फरवरी 2024 को, जो लारेंस का जन्मदिन था, एक पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की ओर से मुरब्बे के डिब्बे, टोपियां और अन्य उपहार साबरमती जेल तक पहुंचाए गए। राजवीर ने दावा किया कि उसे खुद लारेंस ने फोन करके मोहाली स्थित डीएसपी कार्यालय से यह सामान लेने के निर्देश दिए थे। गुरशेर सिंह संधू वही अधिकारी हैं जिन्हें पहले ही लारेंस के विवादित इंटरव्यू मामले में सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
पुलिस-गैंगस्टर गठजोड़ का पुराना इतिहास
पंजाब में पुलिस और गैंगस्टरों के बीच मिलीभगत के आरोप कोई नए नहीं हैं। इससे पहले अक्टूबर 2022 में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का आरोपी दीपक टीनू पुलिस हिरासत से फरार हो गया था, जिसे सीआईए इंचार्ज प्रितपाल सिंह बिना सुरक्षा और हथकड़ी के अपनी प्रेमिका से मिलवाने ले गए थे। इस घटना के बाद प्रितपाल सिंह को बर्खास्त कर दिया गया था।
ड्रग्स के मामलों में भी पूर्व एआईजी राजजीत सिंह की भूमिका जांच के घेरे में रही थी, जिन पर नशा तस्करों को संरक्षण देने और खुफिया जानकारी लीक करने के गंभीर आरोप लगे थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि पंजाब की जेलों में बंद गैंगस्टरों को कुछ भ्रष्ट जेल कर्मियों की मिलीभगत से मोबाइल फोन और अन्य वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं।
‘अस्थायी स्टूडियो’ और प्रशासनिक विफलता
लारेंस बिश्नोई के विवादित इंटरव्यू मामले की एसआईटी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि सितंबर 2022 में खरड़ सीआईए कार्यालय को ही एक ‘अस्थायी स्टूडियो’ में बदल दिया गया था। उस समय लारेंस पुलिस की हिरासत में था और गुरशेर सिंह संधू की निगरानी में था। इसी दौरान वह इंटरव्यू रिकॉर्ड किए गए थे, जिसने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए थे।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि क्या ये घटनाएं केवल कुछ अधिकारियों की व्यक्तिगत चूक थीं या पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क को सिस्टम के भीतर से संगठित मदद मिल रही थी। ‘ऑपरेशन प्रहार’ के दौरान विदेशों में बैठे 61 से अधिक गैंगस्टरों के नेटवर्क की जांच में भी यह आशंका जताई गई है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की निष्क्रियता या सूचना लीक होने से ये अपराधी लंबे समय तक सक्रिय बने रहे।
Author: Rajesh Kumar

