Delhi News: देश की न्यायपालिका और युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर एक अभूतपूर्व डिजिटल टकराव देखने को मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के विरोध में युवाओं ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का गठन किया है। इस डिजिटल मुहिम ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।
इस व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन को शुरू करने वाले युवा का नाम अभिजीत दीपके है। अभिजीत मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर के रहने वाले हैं। इस पैरोडी संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 40 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। इसके साथ ही दो लाख से ज्यादा लोग इसके सदस्य बन चुके हैं।
अभिव्यक्ति की आजादी और न्यायपालिका पर खड़े किए सवाल
जस्टिस सूर्यकांत ने एक अदालती सुनवाई के दौरान तंत्र की आलोचना करने वाले लोगों के लिए कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ शब्द का प्रयोग किया था। हालांकि, बाद में उन्होंने सफाई दी कि मीडिया ने उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया। वे केवल फर्जी डिग्री लेकर वकालत में आने वालों की बात कर रहे थे।
अभिजीत दीपके के मुताबिक, संविधान के संरक्षक द्वारा युवाओं के लिए ऐसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना निराशाजनक है। उन्होंने गुस्से में आकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी कि यदि सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। इसके बाद ‘जेन जी’ युवाओं ने मिलकर इस पैरोडी फ्रंट को तैयार किया।
न्यायाधीशों की निष्पक्षता और महिला प्रतिनिधित्व पर मुख्य ध्यान
इस संगठन की सदस्यता के लिए जानबूझकर मजाकिया और तंज भरे नियम तय किए गए हैं। सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का बेरोजगार, आलसी और हर समय इंटरनेट पर सक्रिय रहना जरूरी है। अभिजीत का कहना है कि यह वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का एक शांतिपूर्ण डिजिटल विद्रोह है।
इस डिजिटल पार्टी का घोषणापत्र पूरी तरह लोकतांत्रिक सुधारों पर आधारित है। इसमें मांग की गई है कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी न्यायाधीश को सरकारी लाभ या राज्यसभा की सीट न दी जाए। इसके साथ ही वे महिलाओं को संसद और कैबिनेट में सीधे 50 फीसदी आरक्षण देने की वकालत भी कर रहे हैं।
बिना किसी हिंसा के अनोखे ढंग से हो रहा विरोध
राजनीतिक विश्लेषक इस अभियान को डिजिटल मीडिया में एक बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद जैसी बड़ी हस्तियों ने भी इसका समर्थन किया है। यह आंदोलन करोड़ों रुपये खर्च करने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक दलों को भी कड़ी टक्कर दे रहा है।
नेपाल, श्रीलंका या बांग्लादेश की तुलना में भारत के युवा हिंसक रास्ता नहीं अपना रहे हैं। वे कॉकरोच का कॉस्ट्यूम पहनकर यमुना नदी की सफाई कर रहे हैं और कूड़ा हटा रहे हैं। वे पूरी तरह से शिक्षित हैं और केवल व्यंग्य के जरिए अपनी गहरी नाराजगी और राजनीतिक इच्छाशक्ति को व्यक्त कर रहे हैं।
अभिजीत ने हाल ही में अमेरिका की प्रतिष्ठित बॉस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है। वे पहले आम आदमी पार्टी की संचार टीम में भी काम कर चुके हैं। वे जल्द ही भारत लौटकर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। युवा अब खोखले भाषणों के बजाय तकनीकी रूप से मजबूत और रोजगारपरक व्यवस्था चाहते हैं।
Author: Harikarishan Sharma

