नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा, फर्जी वीडियो से भड़काई आग, RJD प्रवक्ताओं पर FIR दर्ज

Noida News: नोएडा में हुए हालिया श्रमिक आंदोलन ने नया राजनीतिक और आपराधिक मोड़ ले लिया है। इस मामले में नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की दो महिला प्रवक्ताओं प्रियंका भारती और कंचना यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन दोनों पर सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ वीडियो साझा करने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, इन्होंने अन्य राज्यों के वीडियो को नोएडा का बताया है।

श्रमिकों के प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

नोएडा पुलिस की एफआईआर के मुताबिक श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर धरना शुरू किया था। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बार-बार शांतिपूर्ण बातचीत की अपील की। इसके बावजूद भीड़ पूरी तरह उग्र हो गई। उन्होंने संदीप पेपर मिल और चिल्ला सीमा की तरफ जाने वाले मुख्य रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया। इससे दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित हुआ। आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर हमला

आंदोलन के दौरान अचानक बहुत भारी हिंसा भड़क उठी। उग्र भीड़ ने मदरसन कंपनी के गेट पर हमला कर दिया। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों को बुरी तरह तोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी बैरिकेड्स को भी नुकसान पहुंचाया। इसी दौरान हिंसक भीड़ ने पुलिस टीम पर खतरनाक पथराव शुरू कर दिया। पत्थरों की तेज चपेट में आने से सब-इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। अन्य पुलिस अधिकारी उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गए।

दंगाइयों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

हिंसक स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने सख्त एक्शन लिया। इलाके की घेराबंदी करके उग्र भीड़ को पीछे हटा दिया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने दंगा करने, लोक सेवक को काम से रोकने और चोट पहुंचाने की धाराएं लगाई हैं। एफआईआर में कुल बारह व्यक्तियों को नामजद किया गया है। इसके अलावा सौ से डेढ़ सौ अज्ञात दंगाई भी शामिल हैं। इलाके में नजर रखी जा रही है।

सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो फैलाकर भड़काया माहौल

आरजेडी प्रवक्ताओं ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो साझा किए थे। पुलिस का कहना है कि यह काम पुलिस की छवि खराब करने के इरादे से किया गया। आरोपियों पर झूठी जानकारी फैलाकर आम जनता को उकसाने का आरोप लगा है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की सख्त धारा के अलावा आईटी एक्ट में केस दर्ज किया है। ये कड़े प्रावधान झूठी सूचना फैलाने और ऑनलाइन अपराधों पर लगाम लगाने से जुड़े हुए हैं।

व्हाट्सऐप ग्रुप्स और क्यूआर कोड के जरिए रची गई साजिश

जांच में कुछ अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं। जितेंद्र नामक शख्स ने फेसबुक पर मध्य प्रदेश का वीडियो डालकर उसे नोएडा का बताया। एक ट्विटर हैंडल ने आगजनी का फर्जी वीडियो साझा किया। इन बातों से स्थानीय लोगों में भारी भय पैदा हो गया। पुलिस अधिकारियों को इस उग्र प्रदर्शन के पीछे एक संगठित नेटवर्क का शक है। मजदूरों को जोड़ने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप्स बनाए गए और क्यूआर कोड भी स्कैन कराए गए।

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