मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट से मस्जिद पक्ष को लगा बड़ा झटका, क्या अब शुरू होगा मंदिर का रास्ता?

Uttar Pradesh News: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मस्जिद पक्ष की उस आपत्ति को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें हिंदू पक्ष के मुकदमों की पोषणीयता (मेंटेनेबिलिटी) पर सवाल उठाए गए थे। इस निर्णय के बाद मस्जिद पक्ष को कानूनी मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के इस आदेश से अब विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर चल रहे सिविल वादों की सुनवाई का रास्ता और साफ हो गया है।

संशोधन अर्जी में तकनीकी खामियों ने बिगाड़ा खेल

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दस अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान शाही ईदगाह पक्ष ने एक महत्वपूर्ण संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस अर्जी में मांग की गई थी कि हिंदू पक्षकारों द्वारा दायर सभी मुकदमों को निरस्त कर दिया जाए। मस्जिद पक्ष का तर्क था कि इन वादों में केवल आस्था को आधार बनाया गया है और कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि मस्जिद पक्ष के लिखित कथन में गंभीर तकनीकी त्रुटियां मौजूद थीं।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई मस्जिद पक्ष की दलील?

जस्टिस अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मस्जिद पक्ष ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। अदालत के अनुसार, सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 6 नियम 14 और 15 के तहत जरूरी सत्यापन नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब मूल लिखित कथन ही कानून के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता, तो उसमें संशोधन की मांग करना विचारहीन है। अदालत ने मस्जिद पक्ष की इस रणनीति को प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण माना।

हिंदू पक्ष ने लगाया सुनवाई टालने का आरोप

हिंदू पक्ष के वकील एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं और उनकी जन्मभूमि पर अधिकार सर्वोपरि है। सिंह ने मस्जिद पक्ष पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर मामले को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी तरह की देरी करने वाली रणनीतियां अपनाई गई थीं।

15 मई को होगी मामले की अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने पहले भी आदेश 7 नियम 11 के तहत दाखिल मस्जिद पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया था। अब दोबारा वैसी ही मांग लेकर आने पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। हालांकि, अदालत ने मस्जिद पक्ष को अपनी तकनीकी कमियां सुधारने का एक मौका दिया है। इसके लिए एक अलग अर्जी पर सुनवाई हेतु 15 मई की तारीख तय की गई है। पंद्रह मई को दोपहर दो बजे इस संवेदनशील मामले पर दोबारा जिरह शुरू होगी।

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