Delhi News: चीन में भारत के नवनियुक्त राजदूत विक्रम दोरैस्वामी एक बेहद महत्वपूर्ण मिशन पर तिब्बत पहुंचे हैं। वह वहां के स्थानीय अधिकारियों के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के सुचारू संचालन और भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए की गई विशेष व्यवस्थाओं की संयुक्त समीक्षा कर रहे हैं।
राजदूत विक्रम दोरैस्वामी का इसी साल मई महीने में कार्यभार संभालने के बाद यह पहला तिब्बत दौरा है। राजदूत अपने दूतावास के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ ल्हासा पहुंचे हैं। भारतीय दूतावास के मुताबिक इस पावन यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था इसी महीने के अंत में तिब्बत पहुंचने वाला है।
तिब्बती अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक
ल्हासा पहुंचने के बाद भारतीय राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की। चीनी अधिकारी झाओ पेंग ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को तीर्थयात्रियों के रहने, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की है।
इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद चीनी अधिकारी झाओ पेंग ने भारतीय राजदूत के सम्मान में एक विशेष रात्रिभोज का आयोजन भी किया। पिछले महीने की शुरुआत में पदभार संभालने के बाद से ही राजदूत दोरैस्वामी दोनों देशों के द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए लगातार चीनी विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जाने वाली यह पवित्र यात्रा साल 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण अचानक निलंबित कर दी गई थी। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (एलएसी) पर दोनों सेनाओं के बीच पैदा हुए भारी सैन्य गतिरोध के चलते भी इसे रोकना पड़ा था।
संबंधों में सुधार के बाद दोबारा शुरू हुई यात्रा
लंबे इंतजार के बाद यह ऐतिहासिक यात्रा पिछले वर्ष जून में दोबारा शुरू की जा सकी थी। तब भारतीय तीर्थयात्रियों का पहला समूह लगभग पांच साल के लंबे अंतराल के बाद तिब्बत की पवित्र मानसरोवर झील पर पहुंचा था। इस शुरुआत से शिव भक्तों में भारी खुशी की लहर दौड़ गई थी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनरारंभ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के पुनरुद्धार की दिशा में पहला बड़ा कदम था। यह सकारात्मक फैसला साल 2024 में रूस के कजान शहर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक के बाद संभव हो पाया था।
Pallavi Sharma


