डॉक्टर का नंबर इंटरनेट पर खोजना पड़ा भारी, जालसाजों ने मरीज के परिजनों को बनाया निशाना, खाली कर रहे बैंक खाते

Crime News: औद्योगिक नगरी में शातिर साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है। अब उनके निशाने पर इलाज के लिए डॉक्टरों और प्रतिष्ठित अस्पतालों का मोबाइल संपर्क नंबर तलाशने वाले बेबस मरीज और उनके सीधे-साधे परिजन हैं, जो बड़ी आसानी से झांसे में आ रहे हैं।

इंटरनेट सर्च इंजन के जरिए डॉक्टर का नंबर खोजने वाले लोग अनजाने में साइबर जालसाजों के बिछाए जाल में फंस रहे हैं। जानकारी के अनुसार यह गिरोह इंटरनेट पर नामी अस्पतालों और डॉक्टरों के नाम से अपने फर्जी मोबाइल नंबर और गूगल मैप पर गलत एड्रेस अपडेट कर देता है।

अस्पताल का कर्मचारी बनकर जीतते हैं भरोसा

मरीज जब इलाज की जल्दबाजी में इन नंबरों पर सीधे संपर्क करते हैं, तो ठग खुद को अस्पताल का सीनियर कर्मचारी, रिसेप्शनिस्ट या डॉक्टर का पर्सनल सहायक बताकर उनका भरोसा जीत लेते हैं। इसके बाद वे तुरंत अप्वाइंटमेंट दिलाने या बेड बुक करने के नाम पर एडवांस फीस मांगते हैं।

सोनारी की रहने वाली महिला सपना इसका ताजा शिकार बनी हैं। उन्होंने इलाज के लिए डॉक्टर का नंबर इंटरनेट पर खोजा था। जालसाज ने अप्वाइंटमेंट बुकिंग के नाम पर व्हाट्सएप पर एक फर्जी लिंक भेजा। महिला ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से एक लाख रुपये उड़ गए।

मोबाइल हैक कर चुरा रहे हैं गोपनीय डेटा

साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक अपराधी अब केवल एडवांस फीस वसूलने तक सीमित नहीं हैं। वे पीड़ित को व्हाट्सएप पर एक खतरनाक एपीके फाइल या मालवेयर लिंक भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल करता है, पूरा कंट्रोल हैकर्स के पास चला जाता है।

इसके बाद ठग मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई पिन, गोपनीय पासवर्ड, निजी फोटो और बैंक दस्तावेजों को आसानी से चुरा लेते हैं। हालांकि कदमा के रहने वाले दीपक ने समझदारी दिखाई। लिंक क्लिक करते ही मोबाइल संदिग्ध व्यवहार करने लगा, तो उन्होंने तुरंत फोन बंद कर अपनी गाढ़ी कमाई बचा ली।

साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां

  • डॉक्टर या अस्पताल का नंबर हमेशा उनकी आधिकारिक वेबसाइट या सीधे अस्पताल परिसर जाकर ही प्राप्त करें।
  • फोन पर बुकिंग या इलाज के नाम पर मांगी गई किसी भी एडवांस फीस का ऑनलाइन भुगतान करने से बचें।
  • व्हाट्सएप, एसएमएस या मेल पर आए किसी भी अनजान लिंक या संदिग्ध एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।
  • यदि आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी हो जाए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
  • ठगी का शिकार होने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित कर यूपीआई सर्विस और क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक कराएं।
    Author: Raj Thakur

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