क्या दिवालिया होने की कगार पर है हिमाचल? 1 लाख करोड़ के कर्ज और खाली खजाने का खौफनाक सच!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश इस समय एक बेहद गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सुक्खू सरकार ने पिछले तीन सालों में ही 41,173 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज ले लिया है। हालांकि, सरकार ने इस दौरान 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है। लेकिन राज्य का कुल कर्ज अब 1 लाख करोड़ रुपये के डरावने आंकड़े को पार कर चुका है। केंद्र सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (राजस्व घाटा अनुदान) भी बंद कर दिया है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और आम आदमी पर टैक्स का भारी बोझ डाला जा रहा है।

1 लाख करोड़ के पार पहुंचा कर्ज का पहाड़

संशोधित बजट के आंकड़े प्रदेश की डराने वाली आर्थिक तस्वीर पेश करते हैं। साल 2025-26 में राज्य सरकार की कुल कर्ज देनदारी 1,03,994 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा साल 2026-27 में बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सरकार का कर्ज लगातार एक खतरनाक दर से बढ़ रहा है। साल 2022-23 में कुल कर्ज 76,681 करोड़ रुपये था। यह 2023-24 में 85,295 करोड़ और 2024-25 में 93,625 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 11,965 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का प्रस्ताव भी रखा है।

ब्याज चुकाने में ही खाली हो रहा सरकारी खजाना

कर्ज के साथ-साथ इसका ब्याज भी सरकार की कमर पूरी तरह तोड़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में ब्याज का भुगतान 6,260.93 करोड़ रुपये रहा। साल 2025-26 में यह 6,693 करोड़ रुपये हो गया। अब 2026-27 में ब्याज भुगतान 7,271 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है। विकास कार्यों और पूंजीगत खर्चों के लिए सरकार के पास मात्र 20 प्रतिशत राशि ही बच रही है। इसी बीच सरकार ने जनता की सब्सिडी को भी काफी कम कर दिया है।

इतिहास में पहली बार पेश हुआ इतना छोटा बजट

आर्थिक तंगी का सीधा असर इस बार के बजट सत्र में साफ देखने को मिला। हिमाचल के इतिहास में पहली बार सरकार ने पिछले साल के मुकाबले छोटा बजट पेश किया है। इस बार बजट का आकार लगभग चार हजार करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। पिछला बजट 58 हजार करोड़ रुपये का था। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पूर्व भाजपा सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में 30 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। साल 2012 से लेकर 2025 तक प्रदेश का कर्ज 48 हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख करोड़ के पार हो गया है।

केंद्र ने रोका फंड, आम जनता पर गिरी महंगाई की गाज

केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों का रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद कर दिया है। इससे प्रदेश को अगले पांच सालों में 35 से 40 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्य को हर साल 3500 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलती थी। अब यह मदद पूरी तरह बंद हो गई है। सरकारी खजाना भरने के लिए अब आम जनता की जेब काटी जा रही है। सरकार ने विधानसभा में पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने का बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही प्रवेश कर (एंट्री टैक्स) में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई है।

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