दिल्ली से बंगाल के बीच दौड़ेगी देश की दूसरी बुलेट ट्रेन, महज 6 घंटे में पूरा होगा 1500 किमी का सफर

West Bengal News: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए एक ऐतिहासिक सौगात का एलान किया है। केंद्र सरकार दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच राज्य की पहली बुलेट ट्रेन चलाने जा रही है। यह हाई स्पीड ट्रेन उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के कई बड़े शहरों को आपस में जोड़ेगी।

नबन्ना में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद रेल मंत्री ने यह बड़ी घोषणा की। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर के बाद यह देश का दूसरा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट होगा, जिससे उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरी बेहद कम हो जाएगी।

साल 2028 से शुरू होगा मेगा प्रोजेक्ट का काम

दिल्ली से बंगाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग कॉरिडोर को आपस में जोड़कर तैयार किया जाएगा। इसके पहले हिस्से में दिल्ली-वाराणसी रूट का निर्माण होगा। इसके दूसरे हिस्से में वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी रूट को विकसित किया जाएगा। इस बड़े रेल प्रोजेक्ट पर साल 2028 से जमीनी काम शुरू होने की उम्मीद है।

इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर यात्रियों की सुविधा के लिए कई वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाए जाएंगे। यह ट्रेन नई दिल्ली से शुरू होकर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुल, पटना और न्यू जलपाईगुड़ी तक जाएगी। भविष्य में इस रूट का विस्तार असम के गुवाहाटी तक करने की योजना है।

सिर्फ 6 घंटे में तय होगा 1500 किलोमीटर का सफर

दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की रेल यात्रा में अभी राजधानी एक्सप्रेस या दुरंतो एक्सप्रेस जैसी सुपरफास्ट ट्रेनों से 18 से 20 घंटे का लंबा समय लगता है। लेकिन नया बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनने के बाद 1500 किलोमीटर का यह सफर महज 6 घंटे में पूरा हो जाएगा, जिससे समय की भारी बचत होगी।

यह नई बुलेट ट्रेन ट्रैक पर 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ेगी। इस रूट के शुरू होने से दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में सिर्फ साढ़े तीन घंटे लगेंगे। वहीं वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर तीन घंटे से भी कम समय में आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

रेल परियोजनाओं पर 1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश

यह हाई स्पीड कॉरिडोर उत्तर भारत को पूर्वोत्तर भारत के मुख्य प्रवेश द्वार से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बनेगा। इससे दिल्ली-हावड़ा मुख्य रूट का ज्यादातर हिस्सा भी कवर हो जाएगा। रेल मंत्री ने बताया कि बंगाल में बुलेट ट्रेन समेत अन्य रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है।

पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार सिलीगुड़ी को देश का बेहद संवेदनशील ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर कहा जाता है। यह इलाका पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से भौगोलिक रूप से जोड़ता है। बुलेट ट्रेन के शुरू होने से स्थानीय पर्यटन के साथ-साथ भारतीय सेना और रसद की आवाजाही भी बेहद आसान हो जाएगी।

अटकी हुई रेल परियोजनाओं को केंद्र सरकार देगी नई रफ्तार

रेल मंत्री ने क्षेत्रीय राजनीति पर बोलते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में बंगाल को रेलवे से सिर्फ 4 हजार करोड़ रुपये मिलते थे। लेकिन मोदी सरकार ने साल 2026-27 के बजट में रिकॉर्ड 14,205 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिससे विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार के असहयोग और अदालती मामलों के कारण कोलकाता मेट्रो जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स लंबे समय तक अटके रहे। अब कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नेक्स्ट जनरेशन ट्रेनें शुरू की जाएंगी। पश्चिम बंगाल में 100 से ज्यादा अटकी रेल परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा।

चिकन नेक इलाके में ट्रैक बिछाना बड़ी तकनीकी चुनौती

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण में मुश्किलें

इस महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन रेल कॉरिडोर को बनाने में रेलवे को कई कठिन भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियों से निपटना होगा। घनी आबादी वाले उत्तर भारत के राज्यों में बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण करना सबसे जटिल काम होगा, जिसके लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी होगी।

इसके अलावा सिलीगुड़ी के संवेदनशील चिकन नेक इलाके और इंटरनेशनल बॉर्डर के करीब हाई-स्पीड ट्रैक का डिजाइन तैयार करना आसान नहीं होगा। इस क्षेत्र की नाजुक जमीन और भारी बारिश भी बड़ी बाधा है। मानसून में सड़कें धंसने के खतरे के बीच मजबूत पिलर और सुरक्षित नेटवर्क बनाना एक बड़ा इम्तिहान होगा।

Author: Sourav Banerjee

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