New Delhi News: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने दुनिया में तेल और गैस का भारी संकट पैदा कर दिया है। ईरान ने अहम होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर दिया है। इससे कई देशों के परिवहन रास्ते ठप हो गए हैं। ईरान ने भारत को अपने जहाज सुरक्षित निकालने का भरोसा दिया था। लेकिन अब इस वादे पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तेल-गैस लेकर भारत आ रहे 28 बड़े जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए हैं। इस वजह से भारत में ईंधन की भारी किल्लत होने का डर सताने लगा है।
अनुमति मिलने के बाद भी क्यों फंसे जहाज?
फारस की खाड़ी में फंसे इन 28 जहाजों में से 18 पर भारत का तिरंगा लगा है। बाकी 10 विदेशी टैंकर हैं जो भारत के लिए तेल और गैस ला रहे हैं। ईरान से होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति मिलने के बाद भी जहाजों का फंसना बड़ी चिंता का विषय है। इससे ईरान की नीयत पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फंसे हुए इन 10 विदेशी टैंकरों में भारी मात्रा में एलपीजी और क्रूड ऑयल लदा हुआ है।
देश में गहरा सकता है रसोई गैस का भारी संकट
भारत में करोड़ों घरों की रसोई मुख्य रूप से एलपीजी गैस पर निर्भर है। पश्चिम एशिया के इस भयंकर युद्ध के कारण भारत में तेल और गैस की सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने इस पर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत सरकार की पहली प्राथमिकता होर्मुज स्ट्रेट से तिरंगे वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है। सरकार इसके लिए लगातार गंभीर प्रयास कर रही है।
अब तक कितने जहाजों ने पार किया यह रास्ता?
राजेश सिन्हा ने जानकारी दी है कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय झंडे वाले 8 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकले हैं। इनमें 2 एलपीजी टैंकर भी शामिल हैं। ये सभी जहाज मंगलवार या बुधवार तक भारतीय तटों पर पहुंच सकते हैं। पिछले हफ्ते भी एलपीजी लेकर आ रहे 2 अन्य भारतीय जहाज इस रास्ते से निकले थे। जहाजों के फंसे होने की इस ताजा घटना से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है। ईरान ने इस रास्ते के इस्तेमाल के लिए अपने मित्र देशों को भी बहुत सीमित छूट ही दी है।


