लैटिन अमेरिका में भारत ने गाड़े कामयाबी के झंडे, चीन और पनामा के बिगड़ते रिश्तों के बीच रॉयल एनफील्ड की धाकड़ एंट्री

Panama City: भारत की मशहूर वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड ने लैटिन अमेरिका के बाजार में अपनी मजबूत धाक जमा ली है। कंपनी ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश पनामा में अपनी तीन नई दमदार मोटरसाइकिलें लॉन्च की हैं। यह कदम भारत की वैश्विक व्यापारिक पहुंच का एक बड़ा और अहम संकेत माना जा रहा है। दूसरी तरफ, पनामा के साथ चीन के राजनयिक रिश्ते लगातार बदतर होते जा रहे हैं।

पनामा, निकारागुआ और कोस्टा रिका में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह बड़ी जानकारी साझा की है। दूतावास के मुताबिक, पनामा में भारत के राजदूत सुमित सेठ ने खुद रॉयल एनफील्ड की नई मोटरसाइकिलों को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया। इन नए मॉडलों में गोअन क्लासिक 350, हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन और क्लासिक 650 प्रमुख रूप से शामिल हैं।

भारतीय दूतावास ने इस भव्य लॉन्चिंग को भारत की ‘एक्सपोर्ट स्टोरी’ के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ी सफलता बताया है। चेन्नई के कारखाने से पनामा सिटी की सड़कों तक का यह शानदार सफर भारतीय ब्रांड्स की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। पनामा की खुली डॉलर आधारित अर्थव्यवस्था की वजह से लैटिन अमेरिका का यह पूरा क्षेत्र भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए सबसे किफायती बाजार बन चुका है।

लैटिन अमेरिकी देशों में बढ़ रहा है भारतीय ब्रांड्स पर भरोसा

रॉयल एनफील्ड दुनिया के सबसे पुराने सक्रिय मोटरसाइकिल ब्रांड्स में से एक है। यह धाकड़ कंपनी साल 1901 से लगातार बेहतरीन मोटरसाइकिलों का उत्पादन कर रही है। पनामा के बाजार में इस ब्रांड की मजबूत एंट्री से साफ है कि अब लैटिन अमेरिकी देशों में भरोसेमंद भारतीय प्रोडक्ट्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है।

व्यापारिक डील्स के अलावा भारत ने पनामा में अपनी सांस्कृतिक पैठ भी काफी मजबूत कर ली है। भारतीय दूतावास ने हाल ही में ओल्ड पनामा सिटी के ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से बेहतरीन तालमेल रहा है, जो ‘5Ts’ यानी ट्रेड, ट्रैडिशन, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट पर आधारित है।

जानिए वैश्विक समुद्री व्यापार में पनामा देश की असली ताकत

भौगोलिक दृष्टिकोण से पनामा मध्य अमेरिका का एक छोटा लेकिन बेहद शक्तिशाली देश है। यह देश उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीपों को आपस में जोड़ता है। इस देश की मुख्य ताकत यहां स्थित विश्व प्रसिद्ध पनामा नहर है, जिसे दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग माना जाता है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को सीधे जोड़ती है।

दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का करीब पांच से छह प्रतिशत हिस्सा इसी नहर से होकर गुजरता है। इस मार्ग से हर साल लगभग 14,000 व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जो दुनिया भर के 1,600 से अधिक बड़े बंदरगाहों को आपस में जोड़ते हैं। अमेरिकी व्यापार के लिए यह नहर इतनी जरूरी है कि यहां से गुजरने वाले 74 प्रतिशत माल का सीधा संबंध सीधे अमेरिका से होता है।

अमेरिका के दबाव में चीन से दूर हुआ पनामा, बढ़ा भारी तनाव

पिछले एक दशक में चीन ने पनामा के इंफ्रास्ट्रक्चर और बंदरगाहों में भारी निवेश किया था। पनामा साल 2017 में चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ योजना में शामिल होने वाला पहला लैटिन अमेरिकी देश बना था। हालांकि, साल 2024 तक आते-आते अमेरिका को डर सताने लगा कि चीन इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अपनी सैन्य और खुफिया गतिविधियों के लिए कर सकता है।

इसके बाद अमेरिकी प्रशासन के दबाव में पनामा ने चीन से दूरी बनानी शुरू कर दी। पनामा ने फरवरी 2025 में खुद को चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट से आधिकारिक रूप से अलग कर लिया। इसके बाद जनवरी 2026 में पनामा के सर्वोच्च न्यायालय ने एक चीनी कंपनी के बंदरगाह संचालन समझौते को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया, जिससे गुस्साए चीन ने पनामा के 70 जहाजों को हिरासत में ले लिया।

Author: Rajesh Kumar

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