Business News: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर भारत को एक के बाद एक दो करारे झटके लगे हैं। जापान द्वारा भारत के प्रीमियम कृषि उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के बाद, अब पड़ोसी देश चीन ने भी भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों को लगातार रिजेक्ट करना शुरू कर दिया है।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, चीन ने भारतीय चावल निर्यात पर सख्ती बढ़ाते हुए अब तक करीब 70 खेपों को वापस लौटा दिया है। बीजिंग का आरोप है कि भारत के इस चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश पाए गए हैं, जिससे निर्यातकों में हड़कंप मच गया है।
भारत में नहीं होती जीएम चावल की खेती
भारत सरकार और कृषि विशेषज्ञों ने चीन के इन गंभीर आरोपों को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने स्पष्ट किया है कि देश में कपास को छोड़कर किसी भी अन्य जीएम फसल या चावल की व्यावसायिक खेती बिल्कुल नहीं की जाती है।
पर्यावरण मंत्रालय के अधीन काम करने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) ने भी पुष्टि की है कि देश में जीएम राइस को कोई मंजूरी नहीं दी गई है। पिछले हफ्ते ही चीन ने फिर से 4 से 5 भारतीय चावल के कंटेनरों को जीएमओ का बहाना बनाकर वापस भेज दिया है।
भारतीय निर्यातकों के लाइसेंस किए निलंबित
चीन की इस एकतरफा कार्रवाई के कारण मार्च और अप्रैल महीने में भी कई भारतीय कंपनियों का माल वापस आया था। इतना ही नहीं, चीन ने तीन प्रतिष्ठित भारतीय निर्यातकों के आयात लाइसेंस तक निलंबित कर दिए हैं। इसके बाद से ही चीन की इस गुप्त व्यापारिक रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चीन खुद बड़े पैमाने पर जीएम चावल का उत्पादन करता है, लेकिन वह भारतीय चावल पर सवाल उठा रहा है। भारतीय व्यापार जगत को आशंका है कि बीजिंग अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना चाहता है।
कंटेनरों को बंदरगाहों पर रोका गया
लगातार हो रहे रिजेक्शन के चलते भारतीय निर्यातकों की चिंता बहुत बढ़ गई है। भविष्य के बड़े नुकसान से बचने के लिए कंपनियों ने अपने करीब 200 कंटेनरों को स्वेच्छा से रोक दिया है। कारोबारियों का कहना है कि चीन की इस चाल से वैश्विक खरीदारों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।
इस गंभीर मामले को लेकर भारत और चीन के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत भी हुई है। भारतीय अधिकारियों ने चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) से जांच की तकनीक और रिजेक्शन का ठोस आधार मांगा है। लेकिन चीन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल चावल की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। चीन जिस तरह लगातार भारतीय कृषि उत्पादों को निशाना बना रहा है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच आने वाले समय में व्यापारिक और रणनीतिक तनाव और अधिक बढ़ सकता है।
Author: Rajesh Kumar

