सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फॉर्म चुनने का सही नियम, एक गलत चुनाव और आ जाएगा आयकर विभाग का डिफेक्टिव नोटिस!

Business News: देश के लाखों सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कमाई गई अलग-अलग प्रकार की आय के आधार पर टैक्सपेयर्स कुल चार आईटीआर फॉर्म (ITR-1, ITR-2, ITR-3, या ITR-4) में से सही फॉर्म चुन सकते हैं।

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार सही आईटीआर फॉर्म चुनना बेहद जरूरी होता है। गलत फॉर्म का चुनाव करने से आयकर अधिनियम के सेक्शन 139(9) के तहत ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस आ सकता है। इससे टैक्स रिफंड मिलने में भी भारी देरी हो सकती है और आयकर विभाग जांच बढ़ा सकता है।

सीधी-सादी सैलरी के लिए सबसे बेस्ट है ITR-1 फॉर्म

आमतौर पर देश में पचास लाख रुपये तक की सीधी सैलरी पाने वाले निवासियों के लिए आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत सैलरी, पेंशन, दो हाउस प्रॉपर्टी और बैंक ब्याज जैसे अन्य स्रोतों से होने वाली आय वाले करदाता अपना रिटर्न आसानी से दाखिल कर सकते हैं।

इस फॉर्म के तहत कृषि से होने वाली पांच हजार रुपये तक की आय और सेक्शन 112A के अधीन आने वाले 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स की रिपोर्ट भी की जा सकती है। लेकिन अगर आप किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं या लॉटरी जीत चुके हैं, तो इसका उपयोग नहीं कर सकते।

शेयर बाजार और विदेशी कमाई वाले भरें ITR-2

यदि आपकी सैलरी के अलावा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी प्रॉपर्टी की बिक्री से कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) हुआ है, तो आपके लिए आईटीआर-2 फॉर्म निर्धारित किया गया है। इसके अलावा विदेशी संपत्ति, विदेशी कमाई या एक से अधिक हाउस प्रॉपर्टी वाले करदाता भी इसी फॉर्म को चुनेंगे।

यह फॉर्म उन लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी है जिन्हें अपने पिछले सालों के पुराने नुकसान को आगे यानी कैरी फॉरवर्ड करना होता है। हालांकि, ध्यान रहे कि यदि आपकी सैलरी के साथ-साथ किसी भी तरह के बिजनेस या प्रोफेशनल फ्रीलांसिंग से नियमित आमदनी होती है, तो आप ITR-2 नहीं भर सकते।

बिजनेस और प्रिजम्पटिव टैक्स के लिए अन्य फॉर्म

जो नौकरीपेशा लोग सैलरी के साथ-साथ अपना खुद का कोई छोटा-बड़ा व्यापार या प्रोफेशन चलाते हैं, उनके लिए आईटीआर-3 फॉर्म बनाया गया है। इसमें सभी तरह के बिजनेस लॉस, कैपिटल गेन्स और विदेशी एसेट्स की विस्तृत जानकारी देने की पूरी सुविधा टैक्सपेयर्स को आसानी से मिल जाती है।

दूसरी तरफ आईटीआर-4 (सुगम) उन लोगों और HUFs के लिए है जो प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (अनुमानित टैक्स) का विकल्प चुनते हैं। यदि आपकी प्रोफेशन से कुल टैक्सेबल आय पचास लाख रुपये तक और प्रिजम्पटिव स्कीम के तहत बिजनेस टर्नओवर दो करोड़ रुपये तक है, तो आप इसका लाभ ले सकते हैं।

सीनियर सिटिजन्स न करें आमदनी छिपाने की भूल

इनकम टैक्स विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों को भी सख्त चेतावनी दी है। कई बुजुर्ग यह सोचकर ब्याज या अन्य कमाई की जानकारी छिपा देते हैं कि उस पर पहले ही टीडीएस (TDS) कट चुका है। लेकिन यह लापरवाही सीधे टैक्स नोटिस और टीडीएस क्रेडिट में बड़ी गड़बड़ी की वजह बन सकती है।

Author: Rajesh Kumar

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