New Delhi: सरकारी तेल कंपनियों ने आज ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर आम आदमी की जेब पर बड़ा बोझ डाल दिया है। कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर का तगड़ा इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
ईंधन की कीमतों में इस महीने चौथी बार बड़ी बढ़ोतरी
देश में आम उपभोक्ताओं के लिए मई का महीना बेहद भारी साबित हो रहा है। चालू महीने में ईंधन की कीमतों में यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आज से पहले 23 मई को भी कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 87 पैसे और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए थे।
इससे पहले भी तेल कंपनियों ने 19 मई को पेट्रोल-डीजल की दरों में औसतन 90 पैसे की बढ़ोतरी की थी। वहीं 15 मई को कीमतों में सीधे ₹3 प्रति लीटर का बड़ा उछाल आया था। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से मध्यम वर्ग के बजट पर गहरा असर पड़ रहा है।
चारों महानगरों में ईंधन के नए दाम और रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के चारों बड़े महानगरों में ईंधन की दरें आसमान पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में अब ग्राहकों को एक लीटर पेट्रोल के लिए ₹102.12 चुकाने होंगे। वहीं कोलकाता में पेट्रोल की नई कीमत ₹113.51, मुंबई में ₹111.21 और चेन्नई में ₹107.77 प्रति लीटर हो गई है।
डीजल की कीमतों पर नजर डालें तो दिल्ली में यह अब ₹95.20 प्रति लीटर पर बिक रहा है। इसके अलावा कोलकाता में डीजल के नए दाम ₹99.82, मुंबई में ₹97.83 और चेन्नई में ₹99.55 प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। अलग-अलग राज्यों में टैक्स दरों के कारण यह अंतर दिखता है।
महंगाई बढ़ने की आशंका और आम जनजीवन पर असर
ईंधन की कीमतों में हुए इस बड़े उछाल से देश में मालभाड़ा बढ़ने की पूरी आशंका है। ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर देश के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ेगा। ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए अब किसानों को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इससे फसलों के उत्पादन की लागत बढ़ेगी जिससे आने वाले दिनों में अनाज और अन्य खाद्य सामग्रियां महंगी होने का नया दौर शुरू हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
विशेषज्ञों के अनुसार इस बड़ी बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आया उछाल है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से पहले क्रूड ऑयल 70 डॉलर पर था। अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश की सरकारी तेल कंपनियां लगातार भारी वित्तीय दबाव में चल रही थीं। कंपनियों ने अपने घाटे की भरपाई करने के लिए कीमतों को बढ़ाने का यह सख्त कदम उठाया है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही स्थिति रही तो दाम और बढ़ सकते हैं।
टैक्स और खर्चों के कारण बढ़ जाती है अंतिम कीमत
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। देश में तेल की अंतिम कीमतें तय होने में बेस प्राइस के साथ कई तरह के टैक्स जुड़ते हैं। सबसे पहले कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करने की लागत और कंपनियों का मार्जिन जुड़ता है।
इसके बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क और रोड सेस लगाती है। यह टैक्स पूरे देश में समान रहता है। इसके बाद डीलर अपना निश्चित कमीशन जोड़ते हैं। सबसे आखिर में सभी राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट लगाती हैं, जिससे कीमतें अलग-अलग हो जाती हैं।
लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने के बाद आया उछाल
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से लगातार स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि तकनीकी रूप से कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत पर हर दिन रेट बदल सकती हैं।
राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण देश में लंबे समय तक ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस कारण इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को बड़ा नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का घाटा हो रहा था।
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में पहले की थी बड़ी कटौती
इससे पहले केंद्र सरकार ने तेल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की बड़ी कटौती की थी। इसके तहत पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 की गई थी। वहीं डीजल पर लगने वाली ड्यूटी को ₹10 से घटाकर पूरी तरह शून्य कर दिया गया था।
इस फैसले से पहले एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी जो बाद में ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी। यह कदम कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उठाया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन के सीमित उपयोग की दी सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान इस वैश्विक संकट पर चिंता जताई थी। उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए देशवासियों को पेट्रोलियम उत्पादों का बेहद सावधानीपूर्वक और सीमित उपयोग करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर इसका विपरीत असर न पड़े।
Author: Rajesh Kumar

