New Delhi News: भारत और इटली के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को नई दिल्ली में इटली के अपने समकक्ष गुइडो क्रोसेटो के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में बताया कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच सामरिक हितों और रक्षा सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। बदलते वैश्विक सुरक्षा हालातों को देखते हुए यह मुलाकात रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
रक्षा औद्योगिक साझेदारी पर होगा मुख्य फोकस
रक्षा मंत्री क्रोसेटो की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों की औद्योगिक भागीदारी को नई दिशा देगी। अक्टूबर 2023 में राजनाथ सिंह की रोम यात्रा के बाद से ही दोनों देशों के रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं। अब दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण और तकनीक साझा करने के नए क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा मौजूदा सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत-EU रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती
जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर हुए थे। इसने दोनों पक्षों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को एक नई गति प्रदान की है। इस साझेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में मिलकर काम करने पर सहमति बनी है। राजनाथ सिंह और क्रोसेटो की वार्ता इसी रणनीतिक तालमेल को और आगे ले जाने का कार्य करेगी।
सैन्य प्रशिक्षण और सूचना साझा करने पर जोर
भारत और इटली के रक्षा संबंध अब केवल औपचारिक संवाद तक सीमित नहीं रहे। अब इनमें सेनाओं के बीच नियमित बातचीत, संयुक्त प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों का निर्यात भी शामिल हो गया है। पोर्ट कॉल्स और नौसैनिक अभ्यास जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। साल 2023 के द्विपक्षीय समझौते ने इन सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग का एक ठोस कानूनी ढांचा तैयार कर दिया है।
वार्षिक सुरक्षा संवाद और नए मंच की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच हुई 16वीं शिखर बैठक के बाद सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है। भारत और EU ने ‘सुरक्षा और रक्षा परामर्श’ को अब वार्षिक ‘सुरक्षा और रक्षा संवाद’ में बदल दिया है। इसके अतिरिक्त, एक नए ‘भारत-EU रक्षा उद्योग मंच’ की स्थापना की भी घोषणा की गई है। यह मंच दोनों पक्षों के व्यवसायों और विशेषज्ञों को रक्षा नवाचार के लिए एक साथ लाएगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा रणनीतिक समन्वय
नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई है। नई साझेदारी के तहत अंतरिक्ष और हाइब्रिड खतरों से निपटने के लिए भी विशेष परामर्श किया जाएगा। दोनों पक्ष अपनी रक्षा पहलों को एक-दूसरे के कानूनी ढांचे के अनुरूप ढालने का प्रयास करेंगे। इससे भारत को प्रासंगिक यूरोपीय रक्षा कार्यक्रमों में भागीदारी करने के बेहतर अवसर और रास्ते भी प्राप्त होंगे।


