Delhi News: बहुत से लोगों को आदत होती है कि मौसम चाहे सर्दी का हो या भीषण गर्मी का, वे बिना चादर या कंबल ओढ़े सो नहीं पाते। कई बार लोग इस बात का मज़ाक उड़ाते हैं या इसे महज एक साधारण आदत मान लेते हैं। हालांकि, हालिया मनोवैज्ञानिक शोधों में इसके पीछे बेहद दिलचस्प और गहरे कारण सामने आए हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, गर्मी में भी खुद को सिर से पैर तक ढककर सोने की यह चाहत केवल एक शारीरिक आदत नहीं है। इसका सीधा संबंध इंसान की भावनात्मक और मानसिक स्थिति से होता है। यह आदत इस बात का संकेत देती है कि व्यक्ति अवचेतन रूप से खुद को सुरक्षित महसूस कराना चाहता है।
बचपन का अकेलापन और डर हो सकता है मुख्य कारण
मनोविज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों ने अपने बचपन में अत्यधिक डर, अकेलापन या मानसिक तनाव का सामना किया होता है, वे इस आदत के ज्यादा शिकार होते हैं। रात में सोते समय चादर या रजाई ओढ़ने से उन्हें एक सुरक्षा कवच का अहसास होता है, जिससे उनका मानसिक तनाव कम होता है।
साइकोलॉजी के अनुसार, जो लोग स्वभाव से बहुत ज्यादा संवेदनशील और भावुक होते हैं, वे अक्सर प्यार और अपनेपन की तलाश में रहते हैं। ऐसे संवेदनशील लोगों को हर मौसम में खुद को ढककर सोने से सुकून मिलता है। यह आदत उन्हें बाहरी दुनिया के अनजाने डर से सुरक्षित होने का एक सुखद अहसास कराती है।
इसके अतिरिक्त, जिन लोगों के जीवन में अतीत में कोई भयावह घटना या गहरा सदमा लगा हो, वे भी खुद को सुरक्षित रखने के लिए इस तरीके का सहारा लेते हैं। भारी कंबल या चादर का दबाव शरीर में हैप्पी हार्मोन्स को बढ़ाता है। इससे नर्वस सिस्टम शांत होता है और व्यक्ति को बिना किसी डर के एक गहरी और आरामदायक नींद आती है।
Author: Karuna Sen


