हिमाचल की पंचायतों से रातों-रात छिन गए 150 करोड़ रुपये! जानें किस विभाग को मिला सारा पैसा?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सैकड़ों पंचायतों को राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा झटका दिया है। सरकार ने इन पंचायतों से 150 करोड़ रुपये से अधिक का बजट वापस ले लिया है। यह भारी-भरकम राशि पानी की स्कीमों की मरम्मत के लिए दी गई थी। अब यह सारा पैसा सीधा जल शक्ति विभाग को सौंप दिया गया है। पंचायतें इस पैसे को खर्च करने में पूरी तरह नाकाम रही हैं। बजट लैप्स होने का खतरा काफी बढ़ गया था।

जल शक्ति विभाग करेगा स्कीमों की मरम्मत

अब जल शक्ति विभाग खुद इस बजट को पानी की पुरानी स्कीमों पर खर्च करेगा। विभाग सभी खराब योजनाओं को पूरी तरह दुरुस्त करने का काम करेगा। योजनाएं ठीक होने के बाद इनका रखरखाव वापस पंचायतें ही करेंगी। पंचायतें पानी की स्कीमों के सुचारू संचालन के लिए लोगों से शुल्क भी ले सकेंगी। सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को 31 मार्च तक अपना बचा हुआ बजट विभाग को लौटाने का सख्त आदेश दिया था।

पैसा लैप्स होने से बचाने के लिए उठाया कदम

ज्यादातर पंचायती राज संस्थाओं ने तय समय पर यह पैसा वापस लौटा दिया है। राज्य सरकार का स्पष्ट तर्क है कि पंचायतें समय पर पैसा खर्च नहीं कर पा रही थीं। यह सरकारी पैसा बिना इस्तेमाल के लैप्स न हो जाए, इसलिए यह सख्त कदम उठाया गया। सरकार ने पैसा पंचायती राज संस्थाओं से वापस लेकर तुरंत जलशक्ति विभाग को दे दिया। हालांकि कुछ संस्थाओं से यह पैसा अभी तक वापस सरकार के पास नहीं आया है।

स्टाफ की कमी से पंचायतों में फंसा था बजट

जिला परिषद और पंचायत समितियों के अधिकारियों को 15वें वित्त आयोग के तहत यह बजट मिला था। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस बड़े फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकारी बजट लैप्स न हो, इसलिए यह अहम निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार भी यही चाहती है कि यह बजट पंचायतें अपने स्तर पर खर्च करें। लेकिन पंचायती राज संस्थाओं के पास तकनीकी स्टाफ की बहुत ज्यादा कमी चल रही है।

पंचायतें तय करेंगी पानी की स्कीमों का शुल्क

स्टाफ की कमी के कारण पंचायतों को पैसा खर्च करने में भारी दिक्कत हो रही थी। अब यह सारा बजट जल शक्ति विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है। जल शक्ति विभाग अब गांवों के लिए नई पानी की योजनाएं तैयार करेगा। इन सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर संचालन पंचायतें ही करेंगी। पंचायतें अपने इलाके में योजनाओं के संचालन पर निर्धारित शुल्क भी लगा सकेंगी। इससे पंचायतों की अपनी आमदनी में भी सीधा इजाफा होगा।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मांगा हस्तक्षेप

सरकार के इस फैसले का अब विरोध भी शुरू हो गया है। शिमला जिले के केलवी वार्ड के पूर्व सदस्य मदन लाल वर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक प्रार्थना पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अदालत से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र के साथ राज्य सरकार के आदेश की एक प्रति भी संलग्न करके भेजी है।

केंद्रीय मंत्री को भी भेजा गया शिकायती पत्र

मदन लाल वर्मा ने राज्य के मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर अपनी शिकायत दी है। उन्होंने पंचायती राज सचिव से भी इस तुगलकी आदेश को वापस लेने का आग्रह किया है। लेकिन राज्य सरकार की तरफ से उनकी मांग पर कोई गौर नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री से भी हस्तक्षेप मांगा है। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री और केंद्रीय सचिव को पत्र लिखकर पंचायतों का हक वापस दिलाने की जोरदार अपील की है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है सीधा असर

पंचायतों से इतना बड़ा बजट वापस लिए जाने से ग्रामीण विकास प्रभावित हो सकता है। पंचायत प्रतिनिधियों में सरकार के इस फैसले को लेकर भारी निराशा और रोष है। उनका मानना है कि सरकार को पंचायतों में खाली पड़े पदों को भरना चाहिए था। स्टाफ देकर पंचायतों को मजबूत करने के बजाय उनसे काम छीन लिया गया है। अब देखना होगा कि जल शक्ति विभाग इन योजनाओं को समय पर कैसे पूरा कर पाता है।

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