Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है। इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और भारत के चुनाव आयोग को कड़े निर्देश देने की बड़ी मांग की गई है। इसके तहत आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान पत्र के रूप में ही सीमित करना होगा।
शीर्ष अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, चुनाव आयोग और यूआईडीएआई को औपचारिक नोटिस जारी किया है। देश की सर्वोच्च अदालत इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई आगामी सात अगस्त को करेगी।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि आधार कानून की धारा नौ स्पष्ट रूप से इसकी सीमाएं तय करती है। कानून के मुताबिक यह दस्तावेज किसी व्यक्ति की नागरिकता या स्थायी निवास का कानूनी प्रमाण बिल्कुल नहीं है। यूआईडीएआई के नोटिफिकेशन भी साफ करते हैं कि आधार सिर्फ पहचान का डिजिटल सबूत मात्र है।
वोटर लिस्ट और जन्म प्रमाण पत्र में इस्तेमाल पर रोक की मांग
याचिका के अनुसार अदालतों के पुराने फैसलों के बावजूद इस दस्तावेज का गलत इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। देश में स्कूल एडमिशन, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, जन्म प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए इसे जन्म तिथि का पक्का सबूत मान लिया जाता है। याचिकाकर्ता ने इस गैर-कानूनी व्यवस्था को तुरंत रोकने की मांग की है।
इस जनहित याचिका में नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म छह में आधार के उपयोग को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून के बुनियादी प्रावधानों के खिलाफ है। भारत में 182 दिनों से रहने वाले विदेशी नागरिक भी आसानी से आधार प्राप्त कर सकते हैं।
घुसपैठियों द्वारा सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल पर जताई चिंता
याचिका में दावा किया गया है कि अवैध प्रवासी कमजोर वेरिफिकेशन सिस्टम का फायदा उठाकर यह कार्ड हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और वोटर आईडी जैसे अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवा लेते हैं। यह देश की सुरक्षा और पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से कमजोर करता है।
याचिका के अनुसार इस प्रक्रिया से देश के कल्याणकारी संसाधनों का भारी नुकसान हो रहा है। इसके कारण कल्याणकारी योजनाओं के असली हकदार भारतीय नागरिक अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वोटर लिस्ट में आधार के इस तरह के इस्तेमाल को पूरी तरह अमान्य घोषित किया जाए।
Author: Gaurav Malhotra


