हिमाचल में ‘उड़ता पंजाब’ जैसे हालात! 3 साल में नशे से 66 मौतें, अदालतों में लटके हैं हजारों केस

Himachal News: देवभूमि हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल अब जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य में पिछले तीन सालों के भीतर नशे की ओवरडोज से 66 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। राज्य सरकार ने विधानसभा में विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए ये चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। नशे के इस काले कारोबार ने पूरे प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है।

विधानसभा में विधायक जीत राम कटवाल और प्रकाश राणा ने इस गंभीर मुद्दे को उठाया था। सरकार ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ये आंकड़े साल 2023 से 31 जनवरी 2026 तक के हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 में नशे से 8 लोगों की जान गई। वहीं साल 2024 में 31 और साल 2025 में 27 मौतें दर्ज की गई हैं।

इस तीन साल की अवधि में पुलिस ने नशे से जुड़े 6246 मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 5684 मामलों में चालान बनाकर अदालत में पेश किए जा चुके हैं। अब तक केवल 108 मामलों में ही दोषियों को सजा मिल पाई है। जबकि 139 मामलों में सबूतों की कमी के चलते आरोपी अदालत से बरी हो गए हैं।

अदालतों में लंबित हैं 5 हजार से ज्यादा मामले, तस्करों की संपत्तियां हो रहीं जब्त

सरकार के मुताबिक वर्तमान में 5437 मामले अभी भी अलग-अलग अदालतों में लंबित चल रहे हैं। इसके अलावा 486 मामलों में पुलिस की जांच अभी जारी है। सरकार ने नशे के खिलाफ अपना सख्त रुख साफ किया है। एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए नशा तस्करों की अवैध संपत्तियां भी जब्त की जा रही हैं।

थानों में नशा तस्करों पर पैनी नजर रखने के लिए अलग से विशेष रजिस्टर बनाए गए हैं। आम जनता की मदद के लिए सरकार ने टोल-फ्री नंबर 112 और “नशामुक्त हिमाचल” मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है। इसके अलावा पुलिस लगातार विशेष सर्च अभियान चला रही है और केमिस्ट की दुकानों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं के पुनर्वास के लिए प्रदेश में नशा मुक्ति केंद्र और “दिशा केंद्र” चलाए जा रहे हैं। सरकार ने बताया कि नियमों के तहत 5 ग्राम तक चिट्टा पकड़े जाने पर आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। यह जमानत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और बीएनएस धारा 35 (3) के तहत दी जाती है।

चिट्टे की बढ़ती तस्करी ने बढ़ाई चिंता, 5000 से ज्यादा आरोपियों को मिली जमानत

मध्यम मात्रा (5 ग्राम से 250 ग्राम तक) और व्यावसायिक मात्रा (250 ग्राम से ज्यादा) में खास परिस्थितियों में ही जमानत मिलती है। सरकार ने माना है कि राज्य में चिट्टे के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जो बहुत बड़ी चिंता का विषय है। हालांकि पिछले तीन सालों में कानूनी प्रावधानों के चलते 5298 आरोपियों को जमानत भी मिली है।

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