Himachal News: हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के हजारों तकनीकी कर्मचारियों के लिए होली के बाद एक और दीवाली जैसा माहौल है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन कर्मचारियों की सालों से लटकी पदोन्नति (प्रमोशन) की फाइलों को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के बढ़ते गुस्से को भांपते हुए इस मामले में खुद दखल दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के सभी लंबित फाइलों को मंजूर कर बोर्ड मुख्यालय भेज दिया है। सरकार के इस बिजली की रफ्तार वाले फैसले से कर्मचारी संगठनों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अब जल्द ही सैकड़ों कर्मचारियों को ऊंचे पदों पर तैनाती मिलेगी।
विधानसभा परिसर में बनी पदोन्नति की रणनीति
इस बड़ी कामयाबी के पीछे तकनीकी कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक रही। बीती 27 मार्च को संघ के प्रदेशाध्यक्ष रणवीर सिंह ठाकुर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। यह मीटिंग शिमला स्थित विधानसभा परिसर में हुई थी। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को दो मांग पत्र सौंपे थे। संघ ने विस्तार से बताया था कि कैसे प्रमोशन न मिलने से तकनीकी स्टाफ का मनोबल गिर रहा है। मुख्यमंत्री ने उनकी दलीलों को गंभीरता से सुना और फाइलों को तुरंत क्लियर करने का भरोसा दिया था।
इन पदों पर बहाल होगा प्रमोशन का रास्ता
कर्मचारी संघ ने मुख्य रूप से टी-मेट से एएलएम (ALM) और एएलएम से लाइनमैन के पदों पर पदोन्नति की मांग उठाई थी। इसके साथ ही हैल्पर से इलेक्ट्रीशियन और फोरमैन के पदों पर रुकी हुई प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करने की गुहार लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने इन सभी श्रेणियों के लिए रास्ता साफ कर दिया है। सरकार के इस कदम से फील्ड में काम करने वाले उन लाइनमैन और सहायकों को सीधा फायदा होगा, जो सालों से एक ही पद पर डटे हुए थे। अब विभाग में नई ऊर्जा के साथ काम होने की उम्मीद है।
350 नॉन-आईटीआई कर्मचारियों को मिलेगा ‘वन टाइम’ गिफ्ट
बैठक का एक और संवेदनशील मुद्दा उन 350 नॉन-आईटीआई कर्मचारियों का था, जो अपनी सेवानिवृत्ति के करीब हैं। ये कर्मचारी लंबे समय से ‘वन टाइम प्रमोशन’ की आस लगाए बैठे थे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इन बुजुर्ग कर्मचारियों की मांग को भी स्वीकार कर लिया है। अब ये कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले प्रमोशन का सुख ले सकेंगे। तकनीकी कर्मचारी संघ के महासचिव पवन परमार ने इसे कर्मचारियों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे एक ऐतिहासिक और कर्मचारी हितैषी फैसला करार दिया है।


