Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य में किसी भी संकट के समय लोगों को सरकारी राहत दलों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर गांव में प्रशिक्षित स्थानीय आपदा रक्षक तुरंत राहत कार्य शुरू कर देंगे।
इस नई योजना के तहत राज्य में शुरुआती चरण में पांच हजार आपदा रक्षकों को पूरी तरह तैयार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर 75 हजार करने का है। यह अनूठी पहल दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए संजीवनी साबित होगी।
एसडीआरएफ की टीमें देंगी विशेष ट्रेनिंग
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की विशेषज्ञ टीमें इन स्वयंसेवकों को खास ट्रेनिंग देंगी। योजना के मुताबिक हर महीने करीब 1500 से 2000 आपदा रक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें आशा कार्यकर्ताओं, युवक मंडलों, महिला मंडलों और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को शामिल किया जा रहा है।
यूएनडीपी के सहयोग से तीन दिवसीय कोर्स
यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के तहत दिया जाएगा। सभी स्वयंसेवकों को तीन-तीन दिन की विशेष ट्रेनिंग मिलेगी। इसमें प्राथमिक उपचार, रस्सी बचाव तकनीक, खोज एवं बचाव अभियान, त्वरित प्रतिक्रिया, संचार व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन जैसी जरूरी तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं के शुरुआती घंटों में इन प्रशिक्षित स्थानीय लोगों की भूमिका सबसे ज्यादा अहम होगी। सरकारी राहत दलों के पहुंचने से पहले ये स्वयंसेवक लोगों को सुरक्षित निकालेंगे। इससे संकट के समय राज्य में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी कम किया जा सकेगा।
रेडी परियोजना से ढांचा होगा मजबूत
राज्य आपदा प्रबंधन की ‘रेडी परियोजना’ के तहत हिमाचल में आपदा से पहले ही पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके जरिए बुनियादी ढांचे को बेहद मजबूत बनाया जा रहा है। आपदा रक्षकों का यह मजबूत नेटवर्क प्रदेश के सबसे दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक पूरी तरह फैलाया जाएगा।
Author: Sunita Gupta


