Delhi News: भारत में मानसून के दौरान उमस और गर्मी का कॉम्बिनेशन अब जानलेवा साबित होने लगा है। वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने पर यह “असहनीय हीट स्ट्रेस” (गर्मी का तनाव) खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। इस बदलाव से देश की करीब 1.2 अरब आबादी पर सीधा असर पड़ेगा।
जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून ब्रेक यानी बारिश के बीच के शुष्क दिनों में उमस भरी गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (एजीयू) एडवांसेज पत्रिका में इस रिसर्च के निष्कर्षों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
जन स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर, स्टैनफोर्ड और पर्ड्यू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह संयुक्त अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी का यह लंबा दौर जन स्वास्थ्य और श्रम उत्पादकता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। घनी आबादी वाले संवेदनशील क्षेत्रों में इससे जलवायु लचीलापन बनाए रखना बेहद मुश्किल होगा।
असहनीय गर्मी का तनाव तब पैदा होता है जब शरीर अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण खुद को ठंडा नहीं रख पाता है। अत्यधिक उमस के कारण पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ने लगता है। यह स्थिति अंगों के फेल होने और अंततः मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
चार गुना बढ़ गया प्रभावित क्षेत्रफल
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि 1979 से 2021 के बीच भारत में असहनीय गर्मी का दायरा तेजी से बढ़ा है। 1980 के दशक में जहां सिर्फ 0.1 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इससे प्रभावित था, वहीं 2020 तक यह बढ़कर 0.4 लाख वर्ग किलोमीटर हो गया। यह वृद्धि मानव जीवन के लिए गंभीर चेतावनी है।
आमतौर पर मार्च से जून के महीनों में असहनीय गर्मी का तनाव भारत के आठ प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है। इसका सीधा संबंध देश में हर साल गर्मी से होने वाली मौतों से है। इसके विपरीत, मानसून के मौसम के दौरान अभी केवल एक प्रतिशत हिस्सा ही इस अत्यधिक उमस की चपेट में आता है।
गंगा के मैदान और तटीय इलाकों में हाहाकार
वैज्ञानिकों के अनुसार जब वैश्विक तापमान दो डिग्री बढ़ेगा, तब मानसून में भी गर्मी के मौसम जैसी ही स्थिति पैदा हो जाएगी। यह उमस भरी गर्मी देश के गंगा के मैदानी भागों और तटीय इलाकों में सबसे ज्यादा कहर बरपाएगी। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं इस संकट को बढ़ा रही हैं।
इसके विपरीत, मानसून के दौरान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच ही असहनीय आर्द्र गर्मी का अनुभव होता है। रिसर्च टीम ने पाया कि मानसून के मौसम का यह असहनीय हीट स्ट्रेस वर्तमान में देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के मुख्य रूप से पंजाब राज्य में दर्ज किया गया है।
Author: Gaurav Malhotra


