29 साल बाद मिला न्याय: शिवपुरी हत्या कांड के दोषियों को दिल्ली हाई कोर्ट ने भेजा जेल

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के शिवपुरी इलाके में करीब तीन दशक पहले हुए जघन्य हत्याकांड में अब इंसाफ की मुहर लग गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 1997 में लूटपाट के दौरान एक महिला की हत्या के मामले में दो दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने दोषियों की उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।

हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील को किया खारिज

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा बरकरार रखने का निर्णय लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत के निष्कर्षों में कोई कानूनी त्रुटि या खामी नहीं मिली है। अभियोजन पक्ष ने अनिल कुमार और सूर्य नारायण के खिलाफ आरोपों को पूरी तरह साबित किया है। पीठ ने दोनों दोषियों को एक सप्ताह के भीतर जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने का सख्त आदेश दिया है।

सरेंडर न करने पर पुलिस करेगी कड़ी कार्रवाई

अदालत ने दोषियों को चेतावनी दी है कि यदि वे तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। यह मामला न्याय व्यवस्था की उस मजबूती को दर्शाता है, जहां दशकों बाद भी अपराधियों को उनके किए की सजा मिलती है। दोषियों को अब अपनी शेष सजा जेल की सलाखों के पीछे काटनी होगी।

क्या था 1997 का दिल दहला देने वाला मामला?

इस दर्दनाक घटना की शुरुआत 9 मई 1997 को हुई थी, जब डाबरी पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले शिवपुरी में दूजा देवी का शव उनके घर में मिला था। जांच में यह सामने आया कि अपराधियों ने लूटपाट के इरादे से घर में प्रवेश किया था। उन्होंने धारदार हथियार से महिला का गला काटकर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि घटना से ठीक पहले दोषियों को मृतका के साथ देखा गया था।

निचली अदालत से हाई कोर्ट तक का कानूनी सफर

ट्रायल कोर्ट ने ठोस सबूतों के आधार पर 1 मई 2004 को ही अनिल और सूर्य नारायण को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इस फैसले के खिलाफ दोषियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपील लंबित रहने के दौरान दोनों दोषी लंबे समय तक जमानत पर बाहर रहे थे, लेकिन अब उन्हें दोबारा जेल जाना होगा।

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