अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में बढ़ा सियासी घमासान, जानिए एसआईटी जांच और संतों के तीखे बयानों का पूरा सच

Ayodhya News: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी का मामला अब बेहद गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के गंभीर दावों के बाद इस पूरे मुद्दे ने बड़ा सियासी रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आनन-फानन में इस संवेदनशील मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है।

विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने अयोध्या पहुंचकर अपनी गहन छानबीन शुरू कर दी है। टीम बहुत जल्द अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस बड़ी घटना के सामने आने से उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा अचानक बहुत ऊपर चढ़ गया है।

पीएम मोदी तक पहुंची शिकायत और चालीस से अधिक लोगों से पूछताछ

इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर कई तीखे आरोप लगा रहा है। विवाद इतना बढ़ गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस गंभीर घटना की लिखित शिकायत की गई है। पुलिस ने इस मामले में कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है जिनसे लगातार कड़ी पूछताछ की जा रही है।

जांच एजेंसी ने सोमवार को परिसर से जुड़े चालीस से अधिक लोगों से लंबी पूछताछ की। तीन सदस्यों वाली यह विशेष टीम मंगलवार को भी राम मंदिर परिसर का दौरा करेगी। इस एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

धार्मिक मामलों में पारदर्शिता पर देश के साधु-संतों की बड़ी प्रतिक्रिया

रामलला के मंदिर में चढ़ावे की चोरी की खबरों पर देश के प्रमुख साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिर के चढ़ावे को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत जांच बैठाकर बेहद सराहनीय कदम उठाया है।

उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की गहरी आस्था और सदियों की तपस्या का पावन केंद्र है। इस विषय पर हर हाल में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए। हालांकि, कोई भी चर्चा केवल पुख्ता तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए न कि सोशल मीडिया की किसी मनगढ़ंत अफवाह पर।

बिना धर्म ज्ञान वाले लोगों को प्रबंधन सौंपने पर उठे सवाल

दूसरी तरफ, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जब धर्म का ज्ञान न रखने वाले व्यक्तियों को धार्मिक संस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी मिलती है, तब ऐसी अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं। मंदिरों का प्रबंधन शास्त्रों के अनुसार ही चलना चाहिए।

शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि मंदिर की दान पेटी और रसीदों से मिलने वाले धन का उपयोग केवल गौशाला, गुरुकुल, औषधालय और सामाजिक कार्यों में होना चाहिए। सरकार को इस धन को अन्य कार्यों में खर्च करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि ऐसा होता है, तो सभी धर्मस्थलों पर समान नियम लागू होने चाहिए।

साइकिल की औकात न रखने वालों के पास खड़ी हो गईं बड़ी बिल्डिंग

राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादों से मंदिर की वैश्विक स्तर पर बदनामी हो रही है। इस मामले की पूरी तरह से न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।

महंत कमल नयन दास ने बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि जिनकी कभी साइकिल पर चलने की औकात नहीं थी, आज उनके पास बड़ी-बड़ी आलीशान बिल्डिंग हैं। इस बीच, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी कहा कि चंदे में गड़बड़ी की बातें बहुत पहले से ही सामने आ रही थीं।

अखिलेश यादव के आरोपों को चंपत राय ने किया पूरी तरह खारिज

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब-किताब साफ नहीं है। उन्होंने मंदिर के खजाने से बड़ी राशि गायब होने के आरोप लगाए थे। इसके बाद ही प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा हुआ।

हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मंदिर का सारा लेन-देन डिजिटल और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो रहा है। उन्होंने जनता से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की।

Author: Harikarishan Sharma

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