Maharashtra News: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बारामती विमान हादसे में असामयिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शुरू हुआ राजनीतिक ड्रामा अब एक बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है। पार्टी की कमान संभालने वाली उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था। अब वर्धा के एक वकील ने इस नियुक्ति को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए सीधे राज्यपाल को शिकायती पत्र भेजा है।
वकील हर्षवर्धन गोडघाटे ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को भेजा दूसरा कड़ा पत्र, नियुक्ति रद्द करने की उठाई मांग
विवाद की शुरुआत सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण समारोह से हुई है। उन्होंने इसी वर्ष 31 जनवरी को मुंबई स्थित राजभवन में भव्य कार्यक्रम के दौरान इस शीर्ष पद की आधिकारिक शपथ ली थी। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के महज चार दिनों के भीतर वर्धा के जाने-माने अधिवक्ता हर्षवर्धन शोभा बाबाराव गोडघाटे ने इस नियुक्ति के खिलाफ राज्यपाल को अपना पहला विरोध पत्र भेजा था।
शिकायत पर 103 दिन बीतने के बाद भी नहीं हुई कोई बड़ी कार्रवाई, राजभवन की कार्यप्रणाली पर दागे गंभीर सवाल
अधिवक्ता हर्षवर्धन गोडघाटे ने अपनी पहली वैधानिक शिकायत पर राजभवन द्वारा 103 दिनों तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने के बाद अब दूसरा शिकायती पत्र भेजा है। इस नए और कड़े पत्र के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। वकील ने राज्यपाल कार्यालय पर प्रशासनिक शिथिलता का आरोप लगाते हुए इस संवेदनशील मामले को दोबारा पूरी ताकत से जिंदा कर दिया है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
संविधान के अनुच्छेद 164 का दिया हवाला: पूरे नियम-कायदों में ‘उपमुख्यमंत्री’ पद का कोई वैधानिक उल्लेख नहीं
वरिष्ठ वकील ने अपनी इस महत्वपूर्ण कानूनी शिकायत में भारतीय संविधान के मूल ढांचे को आधार बनाया है। उनके कानूनी तर्क के अनुसार, भारतीय संविधान के प्रसिद्ध अनुच्छेद 164 में केवल राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति का स्पष्ट नियम है। पूरे संवैधानिक दस्तावेज में कहीं भी ‘उपमुख्यमंत्री’ नामक किसी वैधानिक पद का कोई उल्लेख नहीं है। इस वजह से यह पद पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक श्रेणी में आता है।
शपथ लेते समय सुनेत्रा पवार ने दो बार किया ‘उपमुख्यमंत्री’ शब्द का उच्चारण, वकील ने माना संविधान का खुला उल्लंघन
शिकायतकर्ता वकील ने शपथ ग्रहण की लाइव रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए एक और बड़ा दावा किया है। उनका आरोप है कि सुनेत्रा पवार ने राजभवन के मंच से आधिकारिक शपथ पत्र पढ़ते समय जानबूझकर दो बार ‘उपमुख्यमंत्री’ शब्द का स्पष्ट उच्चारण किया था। स्थापित संवैधानिक मर्यादाओं और तय नियमों के तहत यह पूरी तरह अवैध कृत्य है। इसे भारतीय संविधान का खुला और गंभीर उल्लंघन माना जाना चाहिए।
सामान्य प्रशासन विभाग के साल 2013 के परिपत्र की खुली अवहेलना, 12 सप्ताह के भीतर फैसला करना था अनिवार्य
अधिवक्ता ने अपने नए शिकायती पत्र में सुनेत्रा पवार की कुर्सी को चुनौती देने के साथ-साथ राज्यपाल सचिवालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने महाराष्ट्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 18 जनवरी 2013 को जारी एक महत्वपूर्ण परिपत्र (Circular) का संदर्भ दिया है। इस सरकारी आदेश के अनुसार, राजभवन या किसी भी शासकीय कार्यालय को प्राप्त जनहित निवेदनों पर अधिकतम 12 सप्ताह (84 दिन) में फैसला लेना होता है।
प्रशासनिक नियमों की अनदेखी पर बरसे शिकायतकर्ता, महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई कुर्सी बचाने की जंग
वकील ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी पहली कानूनी शिकायत पिछले 103 दिनों से राज्यपाल कार्यालय में बिना किसी निर्णय के लंबित पड़ी है। यह स्थापित प्रशासनिक नियमावली और कानून की स्पष्ट अवहेलना है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुनेत्रा पवार के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया है। इस घटनाक्रम के बाद राकांपा खेमे में अपनी नेता की कुर्सी बचाने के लिए कानूनी मंथन शुरू हो गया है।

