Business News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इन दिनों 8वें वेतन आयोग से जुड़ी हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि नया वेतन कब से लागू होगा। लेकिन अब एक नया सवाल कर्मचारियों को डरा रहा है कि यदि आयोग के गठन में देरी हुई, तो उनके एरियर पर क्या असर पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए पूरे 18 महीने का समय दिया गया है। इसके अनुसार आयोग की रिपोर्ट साल 2027 के मध्य तक आ सकती है। वर्तमान में आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है।
एचआरए के मोर्चे पर होगा सबसे बड़ा नुकसान
8वें वेतन आयोग की नई सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही नया वेतनमान बाद में लागू हो, लेकिन कर्मचारियों का एरियर इसी तारीख से जुड़ना शुरू हो चुका है। हालांकि, इसमें सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि कर्मचारियों को हर भत्ते का एरियर नहीं दिया जाता है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने पर कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का एरियर तो मिल जाएगा। लेकिन हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए (HRA) का एरियर बैक डेट से आमतौर पर नहीं दिया जाता है। यदि वेतन आयोग लागू होने में एक या दो साल की देरी होती है, तो बढ़ा हुआ एचआरए कर्मचारियों को नहीं मिलेगा।
इस नियम के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महंगे महानगरों में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि इन बड़े शहरों में मकान किराया भत्ता यानी एचआरए की दरें देश के अन्य छोटे शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा निर्धारित होती हैं।
एक लाख रुपये तक डूबने की आशंका
इसे एक आसान उदाहरण से समझें तो यदि नए वेतनमान के बाद किसी कर्मचारी के एचआरए में हर महीने पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी होनी तय थी। और यदि आयोग की रिपोर्ट लागू होने में बीस महीने का समय लग जाता है, तो उस कर्मचारी को एक लाख रुपये के एचआरए का सीधा नुकसान होगा।
वेतन आयोग के लागू होने में देरी का सीधा असर सरकार के खजाने पर भी बहुत भारी पड़ेगा। देरी की वजह से हर महीने सैलरी और पेंशन का एरियर लगातार बढ़ता जाएगा। जब सरकार भविष्य में नया वेतनमान लागू करेगी, तब उसे कर्मचारियों को एक साथ बहुत बड़ी रकम का भुगतान करना होगा।
यही मुख्य वजह है कि केंद्र सरकार भी कोशिश करेगी कि रिपोर्ट आने के बाद इसे लागू करने में ज्यादा समय न लगे। फिलहाल, सभी कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और डीए को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग कर रहे हैं। ताकि कर्मचारियों के मासिक वेतन में एक बड़ा और शानदार उछाल आ सके।
Author: Rajesh Kumar


