New Delhi News: भारतीय वायुसेना अपनी युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने जा रही है। भारत सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कई बड़े रक्षा सौदे करने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने संसदीय समिति को इन अहम सौदों की पूरी जानकारी दी है। इनमें 114 राफेल फाइटर जेट्स और 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद शामिल है। इसके अलावा एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम भी खरीदे जाएंगे। वायुसेना की तकनीकी ताकत को इससे एक नया मुकाम मिलेगा।
लोकसभा में हाल ही में रक्षा मामलों की एक रिपोर्ट पेश की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना के पूंजीगत बजट में भारी इजाफा हुआ है। 2025-26 के बजट अनुमानों की तुलना में यह बढ़ोतरी 37.03 फीसदी है। इस बड़े फंड का इस्तेमाल वायुसेना की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा करने में होगा। इनमें राफेल, तेजस, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और आधुनिक ड्रोन की खरीद मुख्य रूप से शामिल है।
आवंटित फंड का उपयोग सेना के आधुनिकीकरण के लिए मुख्य रूप से इन अहम योजनाओं में किया जाएगा:
- मल्टी-रोल फाइटर: 114 राफेल विमानों की बड़ी डील।
- कॉम्बैट इनेबलर्स: AEW&C सिस्टम और स्वदेशी तेजस (Tejas MK1A) जेट।
- ट्रांसपोर्ट विमान: 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA)।
- ड्रोन: मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) वाले आधुनिक ड्रोन।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में बनेंगे 114 राफेल जेट्स
इस साल फरवरी में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया था। परिषद ने मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत 114 राफेल खरीदने को मंजूरी दी थी। इस प्रस्तावित सौदे की कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सभी राफेल जेट पूरी तरह से भारत में ही बनाए जाएंगे। फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर इनका निर्माण करेगी।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सेना का आधुनिकीकरण बहुत जरूरी हो गया है। संसदीय समिति ने वायुसेना से इस फंड का जल्द और सही इस्तेमाल करने को कहा है। इसके साथ ही एक लाख करोड़ रुपये की एक और बड़ी योजना को हरी झंडी मिली है। वायुसेना के पुराने हो चुके एएन-32 (An-32) विमानों को अब पूरी तरह से बदला जाएगा। इनकी जगह 60 नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) सेना के बेड़े में शामिल होंगे।
ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की इस डील में 12 विमान सीधे विदेशों से खरीदे जाएंगे। ये 12 विमान उड़ान की स्थिति में भारत आएंगे। बाकी बचे 48 विमानों का निर्माण स्थानीय स्तर पर भारत में ही किया जाएगा। इस बड़े सौदे की रेस में दुनिया की तीन प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनमें एम्ब्रेयर, लॉकहीड मार्टिन और यूरोपीय कंपनी एयरबस मुख्य रूप से दौड़ में हैं।
आधुनिक युद्ध के लिए तैयार हो रही सेना और नई तकनीक
रक्षा मंत्रालय ने संसदीय समिति को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के बारे में बताया है। युद्ध के मैदान में खुफिया जानकारी के लिए ‘अवाक्स’ (AEWACs) प्रणाली बेहद अहम है। हवा में ईंधन भरने वाले विमान और निगरानी प्लेटफॉर्म भी सेना की ताकत बढ़ाते हैं। ये सभी प्रणालियां तीनों सेनाओं की संयुक्त युद्धक क्षमता में जबरदस्त इजाफा करती हैं। कमांडरों को इससे सटीक रणनीतिक जानकारी मिलती है, जो युद्ध में जीत तय करती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में वायुसेना ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन और स्वदेशीकरण को तेज करने के लिए एक नए निदेशालय का गठन हुआ है। इसे ‘डायरेक्टरेट ऑफ एयरोस्पेस डिजाइन’ (DAD) नाम दिया गया है। यह नया निदेशालय एयरोस्पेस क्षेत्र में नई तकनीकों की खोज कर रहा है। इसके लिए उद्योगों, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर लगातार काम किया जा रहा है।
सेना अब पूरी तरह से स्वदेशी संसाधनों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। नई और उन्नत तकनीकों को रणनीतिक युद्ध समाधानों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। भारत की यह रक्षा तैयारी भविष्य की सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए है। वायुसेना का यह नया और उन्नत रूप दुश्मनों के किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम करने के लिए काफी है।


