West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता जहांगीर खान को पुलिस ने सोमवार को जबरन वसूली के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी नेता को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से उस वक्त दबोचा, जब वह भागने की फिराक में था।
कोलकाता हाई कोर्ट ने २६ मई को जहांगीर खान को मिली कानूनी सुरक्षा वापस ले ली थी। सुरक्षा हटते ही पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। खान के खिलाफ दक्षिण २४ परगना जिले के फाल्टा थाने में जबरन वसूली और रंगदारी की सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को सीमावर्ती क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इस गिरफ्तारी के संबंध में कोई अन्य विस्तृत जानकारी शेयर नहीं की है। फिलहाल आरोपी से कड़ी पूछताछ जारी है।
कोलकाता हाई कोर्ट ने छीनी कानूनी सुरक्षा की ढाल
जहांगीर खान फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। चुनाव से कुछ दिन पहले उन्होंने अचानक अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान किया था। हालांकि, नाम वापसी का समय खत्म होने के कारण ईवीएम मशीन में उनका नाम और फोटो दर्ज रहा था।
इससे पहले कोलकाता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज दर्जनों आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई थी। अदालत ने १८ मई को उन्हें यह अंतरिम राहत दी थी, जिसे बाद में राज्य के बदले हालात को देखते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया गया।
जजों की बेंच ने टिप्पणी की कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों को देखते हुए आरोपी को ऐसी सुरक्षा देना कतई उचित नहीं होगा। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद ही पुलिस प्रशासन के लिए टीएमसी नेता को अरेस्ट करने का रास्ता साफ हुआ था।
राजनीतिक बदले की भावना से केस दर्ज करने का दावा
अदालत में खान के सीनियर वकील किशोर दत्ता ने दलील दी थी कि ४ मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उनके मुवक्किल पर झूठे केस दर्ज किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ये मुकदमे राजनीतिक विद्वेष और बदले की भावना से प्रेरित हैं।
दूसरी तरफ राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कोर्ट में इस सुरक्षा को आगे बढ़ाने की मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछली सुरक्षा केवल २१ मई को फाल्टा में दोबारा हुए मतदान में भाग लेने के लिए ही दी गई थी।
फाल्टा विधानसभा रीपोल के बीच जहांगीर खान द्वारा नाम वापस लेना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना गया था। खान ने तब दावा किया था कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के विकास पैकेज से प्रभावित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है।
Author: Sourav Banerjee


