नाना-नानी ने 75 साल की उम्र में खुद को बताया ‘बायोलॉजिकल पैरेंट्स’, नाती को पाने के लिए बनवाया फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट

- Advertisement -

Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जालसाजी और बच्चे की कस्टडी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गोविंदपुरम के रहने वाले एक 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपती ने अपने ही तीन साल के मासूम नाती को अपना सगा बेटा बताकर उसका फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) बनवा लिया।

बुजुर्ग नानी-नाना ने नगर निगम में झूठा दावा किया कि यह बच्चा उनके घर में ही पैदा हुआ है। हैरान करने वाली बात यह रही कि नगर निगम के अधिकारियों ने बिना किसी जांच और पर्याप्त सत्यापन के सर्टिफिकेट जारी कर दिया। उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि 75 साल की महिला बच्चे को जन्म कैसे दे सकती है।

- Advertisement -

दूसरी तरफ इसी बुजुर्ग दंपती ने अदालत में चल रहे कस्टडी केस में स्वीकार किया है कि उन्होंने यह बच्चा गोद लिया था। दोनों बयानों में भारी अंतर होने से नगर निगम की बड़ी लापरवाही और दंपती का फर्जीवाड़ा पूरी तरह उजागर हो गया है। बुजुर्ग दंपती के बेटे और बेटी दोनों की मौत हो चुकी है।

अधिवक्ता विजय सिंघल ने बताया कि मोदीनगर निवासी हीरा कारोबारी राजीव कुमार शर्मा की शादी वर्ष 2015 में रश्मि शर्मा से हुई थी। संतान न होने पर इस दंपती ने 16 मई 2020 को हापुड़ के एक अस्पताल से एक दिन के नवजात शिशु को कानूनी रूप से गोद लिया था, जिसका नाम श्रीयांशु रखा गया।

सरकारी अस्पताल के टीकाकरण रिकॉर्ड में भी राजीव और रश्मि का नाम ही माता-पिता के रूप में दर्ज है। लेकिन पिछले साल 26 फरवरी 2023 को कैंसर के कारण रश्मि शर्मा का असमय निधन हो गया। बेटी की मौत के बाद ही बच्चे की कस्टडी और गार्जियनशिप को लेकर दोनों परिवारों में विवाद शुरू हो गया।

अदालत के आदेश के बाद दो अलग-अलग स्कूलों में पढ़ने को मजबूर है मासूम

राजीव शर्मा अपने बेटे को लेकर मोदीनगर रहने लगे, जबकि स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग से रिटायर्ड सास-ससुर ने बच्चे की कस्टडी के लिए फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए बच्चे को सप्ताह में तीन दिन पिता और चार दिन नानी-नानी के पास रखने का आदेश दिया।

इस अजीबोगरीब कानूनी आदेश के कारण तीन साल का मासूम बच्चा हफ्ते में तीन दिन पिता के पास मोदीनगर रहता है और वहां के एक स्कूल में पढ़ता है। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत जिला प्रोबेशन अधिकारी के दफ्तर में बच्चे को कागजी कार्रवाई के साथ नाना-नानी को सौंप दिया जाता है।

बाकी के चार दिन बच्चा गाजियाबाद में नाना-नानी के घर रहता है और वहां के दूसरे स्कूल में एलकेजी की पढ़ाई करता है। इस तरह अदालत के अंतरिम आदेश के बाद से मासूम बच्चे का पालन-पोषण दो अलग-अलग शहरों और दो अलग-अलग माहौल में हो रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित है।

एक ही दिन में जारी हुआ प्रमाण पत्र, पिता ने कोर्ट में पेश किए पक्के सबूत

इस कानूनी लड़ाई के बीच बुजुर्ग दंपती ने नगर निगम के कवि नगर जोन से बच्चे का नया बर्थ सर्टिफिकेट जारी करवा लिया। इस प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रेशन की तारीख और सर्टिफिकेट जारी होने की तारीख एक ही यानी 10 जुलाई 2023 दर्ज है, जो निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

पिता राजीव शर्मा ने इस पूरे फर्जीवाड़े और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ अदालत में एक नया प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इसके साथ ही पीड़ित पिता ने इस गंभीर जालसाजी की लिखित शिकायत नगर आयुक्त से भी की है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles