इंटरनेट पर बिना अनुमति निजी फोटो-वीडियो शेयर करना पड़ेगा भारी, सरकार ने लागू किया नया नियम

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Himachal News: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ब्लैकमेलिंग को लेकर भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बिना सहमति के निजी तस्वीरें या वीडियो शेयर करने वालों की अब खैर नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत सरकार ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। हिमाचल प्रदेश के डिजिटल प्रौद्योगिकी विभाग ने इस साइबर सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है।

नई एसओपी के तहत ‘एनसीआईआई’ सामग्री को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि इसमें ऐसी तस्वीरें या वीडियो मुख्य रूप से शामिल हैं। इनमें किसी व्यक्ति के निजी अंग दिख रहे हों या नग्नता प्रदर्शित की गई हो। यौन क्रियाओं वाली सामग्री भी इसी अपराध की गंभीर श्रेणी में आती है। सबसे अहम बात यह है कि ‘डीपफेक’ या तकनीक से बदली गई तस्वीरें भी अपराध हैं।

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प्राइवेट वीडियो वायरल होने पर घबराएं नहीं, यहां करें शिकायत

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह किसी भी व्यक्ति की निजता का सबसे बड़ा उल्लंघन है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा का कड़ा प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति इस भयानक साइबर अपराध का शिकार होता है, तो उसे घबराना नहीं चाहिए। सरकार ने पीड़ितों की तत्काल मदद के लिए कई बेहद सुरक्षित विकल्प तैयार किए हैं। आप नीचे दिए गए तरीकों से अपनी शिकायत तुरंत दर्ज करवा सकते हैं:

  • सबसे पहले संबंधित वेबसाइट या ऐप पर मौजूद रिपोर्ट विकल्प का तुरंत इस्तेमाल करें।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी से संपर्क करके तुरंत आपत्तिजनक कंटेंट हटवाएं।
  • पीड़ित सीधे राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर जाकर अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • तत्काल पुलिस सहायता के लिए टोल-फ्री साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर बिना देरी के कॉल करें।
  • महिलाएं विशेष सहायता और परामर्श के लिए अपने नजदीकी ‘वन स्टॉप सेंटर’ भी जा सकती हैं।
  • आप कानूनी कार्रवाई के लिए नजदीकी पुलिस थाने में जाकर सीधे एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।

अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती हैं। अब भारत में ऐसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी बिल्कुल भी नहीं चलेगी। यदि संबंधित प्लेटफॉर्म आपकी शिकायत पर तय समय में कोई उचित कार्रवाई नहीं करता है। या फिर पीड़ित व्यक्ति उनके द्वारा किए गए समाधान से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है।

ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति न्याय के लिए एक अन्य सरकारी पोर्टल का रुख कर सकता है। आप अपीलीय समिति (जीएसी) के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी अपील आसानी से दर्ज कर सकते हैं। इससे आपको उचित न्याय मिलने और आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से हटाने में पूरी मदद मिलेगी।

आपत्तिजनक सामग्री को भूलकर भी शेयर न करें, पुलिस को दें सूचना

सरकार और विभाग ने आम नागरिकों से भी इंटरनेट की दुनिया में सतर्क रहने की अपील की है। यदि आपको किसी व्यक्ति की आपत्तिजनक या हानिकारक सामग्री मिलती है, तो उसे शेयर न करें। ऐसी गंभीर घटना की तुरंत पुलिस को सूचना देना एक जिम्मेदार नागरिक का पहला कर्तव्य है। यह कदम न केवल पीड़ित की गरिमा बचाता है, बल्कि समाज में सुरक्षित माहौल बनाता है।

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