Delhi News: दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा जबरदस्त तूफान आया है कि भारतीय शेयर बाजार के सबसे मजबूत स्तंभ भी अपनी साख नहीं बचा पाए हैं। देश की दो सबसे मूल्यवान कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक को बहुत तगड़ा वैश्विक झटका लगा है।
साल 2000 के बाद यानी पिछले 26 वर्षों में यह पहला मौका है जब प्रतिष्ठित एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स (MSCI EM) इंडेक्स के टॉप-10 शेयरों की लिस्ट से भारत का एक भी शेयर शामिल नहीं है। विदेशी टेक कंपनियों ने भारतीय दिग्गजों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
टॉप-10 की लिस्ट से कैसे बाहर हुए भारतीय चैंपियन?
यह बड़ा बदलाव रातों-रात नहीं हुआ है। इसी साल मार्च महीने तक एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज इस वैश्विक सूचकांक में बहुत मजबूती से डटे हुए थे। तब एचडीएफसी बैंक सातवें और रिलायंस आठवें स्थान पर काबिज थे। लेकिन हालिया गिरावट के कारण दोनों बाजार के दिग्गज काफी नीचे आ गिरे हैं।
ये दोनों शेयर अब खिसककर क्रमशः 11वें और 12वें पायदान पर आ गए हैं। इस गिरावट का असर इनके व्यक्तिगत वेटेज पर भी पड़ा है, जो अब घटकर 0.8 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। एमएससीआई इंडेक्स दुनिया भर के 700 बिलियन डॉलर से ज्यादा बड़े फंड्स को निवेश की दिशा दिखाता है।
विदेशी टेक कंपनियों ने मारी बाजी, एआई का दिखा दम
इस पूरे उलटफेर के पीछे सबसे बड़ी वजह एआई से जुड़ी कंपनियों का शेयर बाजार में ऐतिहासिक और शानदार प्रदर्शन है। दुनिया के बड़े निवेशकों का पैसा अब भारी मात्रा में एआई लहर का सीधा फायदा उठाने वाली सेमीकंडक्टर और चिपमेकर कंपनियों की तरफ तेजी से मुड़ रहा है।
वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो दिग्गज चिपमेकर कंपनी टीएसएमसी (TSMC) के शेयरों में 48 फीसदी की शानदार तेजी आई है। वहीं सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने 147 फीसदी और एसके हाइनिक्स ने 194 फीसदी का भारी-भरकम उछाल दर्ज किया है, जिसने भारतीय बाजार के चैंपियनों को पूरी तरह सुस्त कर दिया है।
अपने ऑल-टाइम हाई से काफी टूटे रिलायंस और एचडीएफसी
वैश्विक टेक कंपनियों की इस जोरदार बढ़त के विपरीत भारतीय बाजार के दोनों दिग्गज अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गिरे हैं। एचडीएफसी बैंक का शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 26 फीसदी टूट चुका है। जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में ऊपरी स्तर से लगभग 20 फीसदी की बड़ी गिरावट आ चुकी है।
वर्तमान में इस प्रतिष्ठित इंडेक्स में 1,200 से अधिक कंपनियों के शेयर शामिल हैं। हालांकि इनमें लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों का ही है, लेकिन शीर्ष पोजीशन पर अब पूरी तरह ताइवान और कोरियाई कंपनियों का कब्जा हो गया है। इसके चलते भारत का कुल वेटेज गिरकर 10.87 प्रतिशत पर आ गया है।
Author: Rajesh Kumar

