PM Ujjwala Yojana: करोड़ों गरीब परिवारों को लगा बड़ा झटका, अब साल में मिलेंगे सिर्फ इतने ही सब्सिडी वाले सिलेंडर

Delhi News: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या घटा दी है। सरकार के इस बड़े फैसले से देश के करीब साढ़े दस करोड़ गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ाने वाला है। घरेलू गैस की बढ़ी कीमतों के बीच यह कदम उठाया गया है।

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पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अब उपभोक्ताओं को साल भर में नौ की जगह केवल चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही तीन सौ रुपये की सब्सिडी मिलेगी। इसके बाद खरीदे जाने वाले सभी सिलेंडरों के लिए लोगों को बाजार मूल्य चुकाना होगा। इस फैसले से ठीक पहले प्रति सिलेंडर दाम में भी बढ़ोतरी हुई थी।

जानिए आखिर सरकार ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके चलते सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू एलपीजी रिफिल पर सात सौ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बढ़ते वित्तीय घाटे और सब्सिडी बिल को नियंत्रित करने के लिए ही यह सीमा तय की गई है।

इस बड़े बदलाव के बावजूद देश के सभी तैंतीस करोड़ से अधिक आम उपभोक्ताओं को राहत जारी रहेगी। उन्हें बाजार दरों की तुलना में अब भी सात सौ रुपये सस्ता सिलेंडर मिलता रहेगा। इस भारी-भरकम वित्तीय बोझ को केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां मिलकर वहन कर रही हैं।

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साल 2016 से 2026 तक उज्ज्वला योजना का सफर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में पिछले दस वर्षों के दौरान कई बड़े बदलाव और संशोधन देखने को मिले हैं:

  • साल 2016 में उत्तर प्रदेश के बलिया से गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने के लिए इसकी शुरुआत हुई थी।
  • साल 2021 में शुरू हुए दूसरे चरण में मुफ्त कनेक्शन के साथ पहला रिफिल और चूल्हा भी मुफ्त दिया गया।
  • कोरोना महामारी के दौरान संकट से निपटने के लिए लाभार्थियों को तीन सिलेंडर पूरी तरह मुफ्त दिए गए थे।
  • साल 2023 में सब्सिडी बढ़ाकर तीन सौ रुपये की गई और साल 2025 में सालाना नौ सिलेंडरों को मंजूरी मिली थी।
  • वर्तमान में जून 2026 से इस सीमा को घटाकर अब सालाना केवल चार सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है।

आंकड़ों की जुबानी समझिए एलपीजी का पूरा गणित

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लाभार्थियों की गैस खपत में साल दर साल काफी सुधार दर्ज किया गया है। वित्तीय वर्ष 2020 में प्रति व्यक्ति औसत सिलेंडर खपत सालाना तीन रिफिल थी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर प्रति व्यक्ति औसतन 4.47 रिफिल तक पहुंच गया था।

इस बढ़ती खपत के कारण चालू वित्तीय वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल घाटा बढ़कर साठ हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल यह नुकसान इकतालीस हजार करोड़ रुपये था। इस घाटे की भरपाई के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने तेल कंपनियों को भारी मुआवजा मंजूर किया है।

देश के प्रमुख बड़े शहरों में घरेलू सिलेंडरों के दाम

वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों में चौदह किलो वाले सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं:

  • हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर सबसे महंगा यानी 994 रुपये में मिल रहा है।
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गैस सिलेंडर का भाव 979.50 रुपये तय है।
  • कोलकाता में यह 968 रुपये, चेन्नई में 957.50 रुपये और चंडीगढ़ में 951.50 रुपये का है।
  • दिल्ली में उपभोक्ताओं को 942 रुपये और मुंबई में 941.50 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
  • नोएडा में सिलेंडर सबसे सस्ता है, जहां इसकी कीमत 939.50 रुपये दर्ज की गई है।

Author: Rajesh Kumar

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