मेरठ नगर निगम की घोर लापरवाही से बदहाल हुए शहर के सैकड़ों पार्क, करोड़ों का बजट फूंकने के बाद भी नहीं सुधरी सूरत

Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में जनता को ताजी हवा और हरियाली का अहसास कराने के लिए बनाए गए सैकड़ों पार्क प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो चुके हैं। स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि शहर के अधिकतर पार्कों की वर्तमान हालत किसी पुराने और डरावने जंगल जैसी नजर आने लगी है।

- Advertisement -

पार्कों में चारों तरफ भयंकर झाड़ियां उगी हुई हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए लगे लोहे के झूले पूरी तरह जंग खा चुके हैं। ये टूटे झूले अब किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। इस बदहाली को सुधारने के लिए सात दिवसीय विशेष मीडिया अभियान की शुरुआत की जा रही है।

करोड़ों के भारी-भरकम फंड आवंटन के बाद भी जमीनी स्तर पर काम नहीं

मेरठ नगर निगम का कुल क्षेत्रफल लगभग 450 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे कुल 80 वार्डों में विभाजित किया गया है। यहाँ की लगभग 45 लाख की बड़ी आबादी को शुद्ध वातावरण देने के लिए 625 पार्क बनाए गए थे।

सरकारी कागजों में नगर निगम के पास केवल 300 पार्कों का ही लिखित रिकॉर्ड दर्ज है। बाकी के बचे हुए पार्क कहां गायब हो गए, इसकी सटीक जानकारी खुद प्रशासन के पास भी नहीं है। पिछले वित्तीय बजट में इन पर्यटन स्थलों को चमकाने के लिए करीब 33 करोड़ का बड़ा फंड मंजूर हुआ था।

- Advertisement -

नगर निगम ने संशोधित बजट में पार्कों के उचित रखरखाव के लिए 65 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी की थी। इसके तहत कुछ प्रमुख पार्कों के विकास के लिए करीब 9.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। लेकिन सही देखरेख न होने से करोड़ों का बजट पूरी तरह पानी में बह गया।

आउटर कालोनियों के पार्कों में लगा गंदगी का अंबार और पसरा अंधेरा

मेरठ मुख्य सिटी के साथ ही आउटर कालोनियों में स्थित सैकड़ों पार्कों की दुर्दशा बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इन पार्कों में अब स्थानीय लोग कचरा और भारी कूड़ा डंप कर रहे हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर लोग खुले में शौच तक कर रहे हैं।

शाम ढलते ही इन बदहाल पार्कों में पूरी तरह से घुप्प अंधेरा छा जाता है। छह साल पहले कुल 11 पार्कों के सुंदरीकरण की योजना तैयार हुई थी। इसके तहत प्रसिद्ध अमृत योजना से लगभग 13.56 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि भी स्वीकृत की गई थी।

इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि अधिकतर पार्क आज भी पूरी तरह उजाड़ पड़े हैं। लोहिया पार्क का निर्माण कार्य कुछ महीने पहले ही शुरू हो सका है। वहीं लेडीज पार्क, गंगानगर और पल्लवपुरम के पार्कों का काम छह साल बाद भी केवल 70 फीसद ही पूरा हुआ है।

अमृत योजना के तहत किए गए बजट खर्च का पूरा ब्योरा

नगर निगम ने अमृत योजना में गंगानगर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार और पल्लवपुरम जैसे चुनिंदा क्षेत्रों को ही विशेष वरीयता दी है। जबकि दिल्ली रोड की तरफ रेलवे रोड चौराहे से लेकर परतापुर औद्योगिक क्षेत्र तक की कालोनियों का एक भी पार्क इस योजना में शामिल नहीं हुआ।

अमृत योजना के अंतर्गत पार्कों पर अब तक खर्च हुए सरकारी बजट का आधिकारिक विवरण इस प्रकार है: * मंगलपांडे पार्क: 1.11 करोड़ रुपये * शास्त्रीनगर सामुदायिक पार्क: 1.20 करोड़ रुपये * जागृति विहार सेक्टर-दो पार्क: 83.23 लाख रुपये * सूरजकुंड पार्क: 1.35 करोड़ रुपये * लेडीज पार्क जैदी सोसायटी: 40.06 लाख रुपये * लेडीज पार्क बच्चा पार्क चौराहा: 1.00 करोड़ रुपये * लोहिया पार्क: 4.08 करोड़ रुपये * पल्लवपुरम फेस-एक पार्क: 98.99 लाख रुपये * गंगानगर ब्लाक सी पार्क: 1.48 करोड़ रुपये * जागृति विहार सेक्टर एक पार्क: 89.37 लाख रुपये * गंगानगर राधा गार्डन पार्क: 1.01 करोड़ रुपये

स्थानीय जनता और प्रशासनिक अधिकारियों का मुख्य वर्जन

स्थानीय निवासी अभिषेक शर्मा ने बताया कि पार्क का सुंदरीकरण कार्य हुए दो महीने से अधिक का लंबा समय बीत चुका है। लेकिन अब तक वहां से भारी मलबा, कटे हुए पेड़ और कंटीली झाड़ियां नहीं हटाई गईं। सफाई कर्मचारी इस तरफ झांकने तक नहीं आते हैं।

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि सूरजकुंड पार्क, शहीद स्मारक और गांधी बाग जैसे ऐतिहासिक पार्क हमारे मेरठ की असली पहचान हैं। प्रशासन को कम से कम इन मुख्य स्थलों को तो बिल्कुल दुरुस्त रखना चाहिए। गंदगी के कारण लोगों का घूमना-फिरना दूभर हो गया है।

इस पूरे मामले पर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि अमृत योजना के तहत फिलहाल 12 पार्क चयनित किए गए हैं। इन सभी पार्कों में टूटे हुए फुटपाथ की मरम्मत, घास कटाई, पौधरोपण और लाइटिंग का कार्य तेजी से चल रहा है।

Author: Ajay Mishra

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles