Chandigarh News: पंजाब के बहुचर्चित मलोट रिश्वतकांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख के रीडर ओम प्रकाश सिंह राणा से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों ने जांच एजेंसी को कई नई दिशाएं दी हैं।
आरोपी ओम प्रकाश सिंह राणा से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में बेहद चौंकाने वाले डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। इन सबूतों से कथित रिश्वत मांगने, अधिकारियों की आपसी सांठगांठ और आपराधिक साजिश से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पड़ताल अब काफी तेज हो गई है।
सीबीआई की ओर से दर्ज एफआइआर में विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख शरद सत्य चौहान के नाम का उल्लेख होने की चर्चा पहले से ही सियासी गलियारों में होती रही है। हालांकि, जांच एजेंसी की तरफ से अब तक उनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष आपराधिक भूमिका का आधिकारिक आरोप सामने नहीं आया है।
मोबाइल चैट से खुलेगा रिश्वत का पूरा नेटवर्क
रीडर राणा के बरामद मोबाइल फोन से कुछ ऐसी गोपनीय चैट और संपर्क विवरण मिले हैं, जिन्होंने पूरी जांच का रुख मोड़ दिया है। इन नए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आधार बनाकर सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है।
आरोपी राणा फिलहाल सीबीआई की हिरासत में है और उसका रिमांड आठ जून को समाप्त होना है। पूछताछ के दौरान मिले नए तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने अगले चरण की रणनीति तैयार कर ली है। जांच एजेंसी अब इस मामले के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रही है।
आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर होगी पूछताछ
सीबीआई सोमवार को मॉडल जेल, चंडीगढ़ में बंद राघव गोयल और ड्राइवर अंकित वधवा को प्रोडक्शन वारंट पर अपने कब्जे में लेकर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी की मुख्य योजना राणा, राघव गोयल और अंकित वधवा को आमने-सामने बैठाकर कड़ाई से पूछताछ करने की है।
माना जा रहा है कि इस संयुक्त पूछताछ प्रक्रिया से रिश्वत लेन-देन की कथित श्रृंखला, बिचौलियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। मलोंट निवासी विकास गोयल और उसका पुत्र राघव गोयल इस मामले में कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका निभा रहे थे।
किस स्तर पर तय हुई थी 13 लाख की डील?
जांच एजेंसी अब मुख्य रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर तय हुई और यह मोटी रकम किन-किन लोगों तक पहुंचनी थी। मामले की शुरुआत 11 मई को हुई थी, जब सीबीआई ने चंडीगढ़ के एक होटल में ट्रैप लगाकर अंकित वधवा को 13 लाख रुपये नकद के साथ दबोचा था।
इस ट्रैप कार्रवाई के बाद विकास गोयल और राघव गोयल को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन उस समय ओम प्रकाश सिंह राणा भागने में सफल रहा था। बाद में राणा ने सीबीआई की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद पंजाब सरकार ने 18 मई को राणा को नौकरी से निलंबित कर दिया था।
Author: Gurpreet Singh

