Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक जंग शुरू हो गई है।
बीजेपी की शिकायत पर निर्वाचन अधिकारी ने लिया बड़ा फैसला
भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार की सुबह निर्वाचन अधिकारी के समक्ष मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक गंभीर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। बीजेपी का सीधा आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित अपने एक कानूनी मामले की जानकारी नामांकन दस्तावेजों में पूरी तरह छिपाई है।
शाम को जारी अपने आधिकारिक आदेश में रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालती मामले का उल्लेख नहीं किया है। इस कारण उनका शपथ पत्र पूरी तरह अपूर्ण माना गया और चुनाव आयोग के नियमों के तहत उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
नामांकन रद्द होने के बाद दिल्ली में चुनाव आयोग दफ्तर पहुंचे दिग्गज नेता
इस फैसले की खबर मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और केसी वेणुगोपाल तुरंत नई दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने वहां पहुंचकर सुरक्षाकर्मियों से दरवाजा खोलने को कहा ताकि वे अपनी मुख्य याचिका आयोग के सामने प्रस्तुत कर सकें।
दरवाजा न खुलने पर केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश सहित सभी दिग्गज नेता चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर ही धरने पर बैठ गए। कांग्रेस संगठन के महासचिव वेणुगोपाल ने पत्रकारों से बात करते हुए इस पूरी कार्रवाई को लोकतंत्र की सरेआम हत्या और बीजेपी की राजनीतिक साजिश करार दिया है।
अदालती संज्ञान और कानूनी प्रावधानों पर उलझा पूरा मामला
रिटर्निंग अधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिकायत वाले मामले में अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी थी। मीनाक्षी नटराजन को पेश होने के लिए समन भी जारी हो चुके थे। नटराजन ने उस मामले में अपना जवाब भी दाखिल किया था, जिससे साबित होता है कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी।
दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले को पूरी तरह असंवैधानिक बताया। उनका तर्क है कि यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223(1) के तहत केवल प्रारंभिक सुनवाई के लिए था, इसलिए इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
बीजेपी ने बताया सत्य की जीत तो मीनाक्षी ने कहा ‘सीट चोरी’
नामांकन निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता राकेश सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे सत्य की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार ने जानबूझकर तेलंगाना के एक मामले को छिपाया था। उनके फॉर्म में गंभीर त्रुटियां थीं, जिसके कारण यह कानूनी कार्रवाई हुई है।
वहीं मीनाक्षी नटराजन ने बीजेपी पर ‘सीट चोरी’ करने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास विधानसभा में तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए जरूरी वोट नहीं थे। इसलिए उन्होंने एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके खिलाफ एक सामान्य कानूनी नोटिस को राजनीतिक हथियार बनाया है।
बेंगलुरु जाने वाले थे कांग्रेस विधायक और विधानसभा का गणित
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास 164 विधायक हैं। कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से केवल 62 विधायक बचे हैं। राज्य में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कुल 58 मतों की आवश्यकता होती है। इस गणित के अनुसार, बीजेपी दो और कांग्रेस आसानी से एक सीट जीत रही थी।
बीजेपी ने इस चुनाव में तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को मैदान में उतारा था। बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की एंट्री से चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था, इसलिए वह अपने सभी विधायकों को विशेष विमान से बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का क्या है कहना
मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार, कांग्रेस के पास अभी नामांकन वापसी की तारीख तक चुनाव आयोग या कोर्ट में अपील करने का मौका है। यदि सक्षम अदालत या आयोग इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप नहीं करता है, तो बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे।
वरिष्ठ पत्रकार नितेंद्र शर्मा ने बताया कि बीजेपी ने साल 2020 में भी कांग्रेस के 22 विधायक तोड़कर सरकार बदल दी थी। हालांकि, राज्यसभा में ओपन वोटिंग होने के कारण इस बार विधायकों को तोड़ना थोड़ा कठिन था। लेकिन अब मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने से पूरी बाजी पलट चुकी है।
Author: Harikarishan Sharma

