Prayagraj News: नदियों में बालू और पहाड़ों पर गिट्टी-पत्थर के अवैध खनन को रोकने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है। इसके परिवहन पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट तकनीक का व्यापक उपयोग होगा। इस आधुनिक प्रणाली से खनन माफिया को रंगे हाथ पकड़ना आसान हो जाएगा।
अवैध खनन होते ही तुरंत जनरेट होगा अलर्ट
खनन मंत्रालय और भारतीय खान ब्यूरो ने मिलकर इस विशेष तकनीक को विकसित किया है। यह प्रणाली पट्टा सीमा से बाहर 500 मीटर तक के दायरे में होने वाले भूमि-पैटर्न के बदलावों का विश्लेषण करती है। कहीं भी अवैध खनन पाए जाने पर यह सिस्टम तुरंत एक ऑटोमैटिक अलर्ट जनरेट कर देगा।
सिस्टम से मिले इस अलर्ट को तत्काल सत्यापन के लिए संबंधित राज्य सरकारों के पास भेजा जाएगा। सैटेलाइट इमेजरी के जरिए अवैध खनन की सटीक जगह और उसकी गहराई का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र की थ्रीडी इमेजिंग करके पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जीपीएस और डिजिटल टैग से लैस होंगे वाहन
गंगा, यमुना, चंबल, केन और बेतवा नदियों में इस खास प्रक्रिया को ड्रोन कैमरों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा खनन क्षेत्रों से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों को अनिवार्य रूप से जीपीएस और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग से ट्रैक किया जाएगा। इसके लिए नया माइंस सर्विलांस सिस्टम काम करेगा।
इस पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक कंट्रोल एंड कमांड सेंटर तैयार हो चुके हैं। प्रशासन ने प्रयागराज में पहला मानव रहित डिजिटल चेक गेट भी स्थापित कर दिया है। मीरजापुर, सिंगरौली, बांदा और रीवा राजमार्ग जहां मिलते हैं, ठीक उसी लेप्रेसी मिशन चौराहे पर यह गेट लगा है।
बिना कर्मचारियों के ऑटोमैटिक होगी वाहनों की जांच
इस एआइ और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित चेक पोस्ट पर हाई-रेज़ोल्यूशन वाले तीन कैमरे लगे हैं। ये कैमरे अवैध खनन का परिवहन करने वाले वाहनों की आगे, पीछे और ऊपर से जांच करते हैं। ये कैमरों की मदद से वाहनों के नंबर रीड कर फौरन रिपोर्ट कमांड सेंटर भेजते हैं।
इस डिजिटल गेट पर बिना किसी कर्मचारी की मौजूदगी के वाहनों की पूरी जांच होती है। इसमें लगे आटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर वाहनों की फिटनेस के साथ ओवरलोडिंग भी चेक करते हैं। अगले महीने से इस नए ऐप और एआइ तकनीक से अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा।
Author: Ajay Mishra

