Delhi News: देश के प्रमुख शहरी इलाकों में होटल कारोबार बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा से जुड़ी जमीनी तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। फायर ब्रिगेड विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शहर के कुल 136 होटलों ने जरूरी एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था।
इन आवेदनों में से प्रशासन ने 107 होटलों को अपनी मंजूरी दे दी है। जबकि 29 गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हो सकी है। दमकल विभाग का स्पष्ट कहना है कि औचक निरीक्षण के दौरान मिली भारी कमियों की वजह से इन फाइलों को फिलहाल लंबित रखा गया है।
बिना सर्टिफिकेट सिर्फ आवेदन के भरोसे चल रहे होटल
विभागीय सख्ती न होने के कारण तमाम बड़े होटल केवल ऑनलाइन आवेदन पर्ची के बल पर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने इन डिफाल्टरों पर अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की है। होटलों में रुकने वाले अनजान मेहमानों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर यह बेहद गंभीर लापरवाही है।
कागजों पर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह शुरू हो चुकी है, लेकिन हर आवेदन अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच सका। फायर विभाग के रिकॉर्ड में अटके यह 29 होटल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें रोजाना बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी लोग ठहरते हैं। सुरक्षा मानकों की ऐसी अनदेखी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी के कारण रुकी फाइलें
इन होटलों में शादी समारोह, बड़ी कारोबारी बैठकें और पर्यटन गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं। ऐसे में फाइलों का लंबे समय तक पेंडिंग रहना सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं है। आम नागरिकों को यह बिल्कुल पता नहीं होता कि जिस होटल के कमरे में वे ठहरे हैं, वह कितना सुरक्षित है।
फायर विभाग के अनुसार इन मामलों की सबसे बड़ी वजह निरीक्षण में मिली तकनीकी कमियां हैं। विभागीय रिकॉर्ड में स्पष्ट दर्ज है कि आपातकालीन अग्निशमन व्यवस्था पूर्ण नहीं होने के कारण एनओसी रोकी गई है। संचालकों को नियमों में सुधार के कड़े निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
सरकारी नोटिस को भी होटल संचालकों ने नहीं दी तवज्जो
विभाग का दावा है कि कमियां मिलने पर सिर्फ फाइल बंद नहीं की गई। दमकल कर्मियों ने बाकायदा विशेष अभियान चलाकर सभी डिफाल्टर संस्थानों को कानूनी नोटिस जारी किए थे। समय-समय पर जरूरी सुधार कार्य कराने के लिखित निर्देश भी दिए गए। इसके बावजूद होटलों में सुरक्षा उपकरण नहीं लगाए गए।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि इससे यह बड़ा सवाल भी उठता है कि जब नोटिस मिलने के बाद भी संचालकों ने सुधार नहीं किया, तो पुलिस और प्रशासन का हंटर इन पर क्यों नहीं चला?
अस्पतालों और शॉपिंग मॉल्स में पेंडेंसी है पूरी तरह शून्य
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिना एनओसी के ही इन असुरक्षित होटलों में लगातार कमरे बुक हो रहे हैं। बाहरी मेहमान बेखौफ होकर ठहर रहे हैं और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। किसी भी अचानक आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना इन इमारतों में बेहद मुश्किल होगा।
दमकल विभाग के आंकड़ों से एक और दिलचस्प बात सामने आई है। शहर के अस्पतालों, बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य बहुमंजिला संस्थानों की श्रेणी में फिलहाल एक भी आवेदन लंबित नहीं है। वहां पेंडेंसी पूरी तरह शून्य है। यानी अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर सबसे ज्यादा लापरवाही इसी होटल सेक्टर में जारी है।
Author: Raj Thakur

