Shimla News: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने हिमाचल प्रदेश में मॉनसून सीजन को लेकर अपनी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। पहाड़ी राज्य में भारी बारिश और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मौसम की चुनौतियों के बीच नेशनल हाईवे पर यातायात को सुचारू रखना है।
खतरनाक और संवेदनशील इलाकों की हुई पहचान
अधिकारियों ने नेशनल हाईवे पर भूस्खलन और बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए विस्तृत सर्वे किया है। इस विशेष जांच के बाद जोखिम वाले रास्तों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन ब्लैक स्पॉट को ठीक करने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का लगातार उपयोग कर रहा है।
राजमार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए पहाड़ों की ढलानों को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रेनेज सिस्टम यानी जल निकासी व्यवस्था को सुधारा जा रहा है ताकि पानी जमा न हो। जगह-जगह मजबूत दीवारों का निर्माण करके मिट्टी के कटाव और मलबे को सड़कों पर आने से रोकने की तैयारी है।
पिछले साल की आपदा से लिया बड़ा सबक
अथॉरिटी उन मुख्य हिस्सों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है जो पिछले साल मॉनसून में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। तात्कालिक राहत कार्यों के साथ-साथ लंबे समय के प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है। इसमें नए मजबूत पुलों और सुरक्षा ढांचों का निर्माण शामिल है।
आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पूरे प्रदेश में एक मजबूत क्विक रिस्पांस नेटवर्क तैयार किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के संवेदनशील मोड़ों पर अत्याधुनिक निर्माण उपकरण, भारी मशीनरी और तकनीकी एक्सपर्ट्स तैनात किए गए हैं। इससे कहीं भी रास्ता बंद होने पर मलबा हटाने का काम तुरंत शुरू हो सकेगा।
यात्रियों के लिए जारी की गई जरूरी एडवाइजरी
प्रशासन ने बेहतर तालमेल के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन टीम के साथ हाथ मिलाया है। आपातकालीन स्थिति में तुरंत ट्रैफिक बहाल करने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करेंगे। कंट्रोल रूम के जरिए सड़कों की स्थिति पर चौबीसों घंटे लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है।
अथॉरिटी ने सभी चालकों और पर्यटकों को भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। लोग सफर शुरू करने से पहले सरकारी ट्रैफिक अपडेट जरूर चेक कर लें। किसी भी अप्रिय घटना या जाम की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करें।

