किसानों के लिए बड़ी खबर: सरकार ने बढ़ाया प्याज का खरीद मूल्य, जानें अब क्या मिलेगा नया रेट

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Nashik News: केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं को बड़ी आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अपने बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर अब 16.50 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया है।

इससे पहले तक सरकारी एजेंसियों द्वारा प्याज की खरीद 15.80 रुपए प्रति किलो की दर से की जा रही थी। सरकार द्वारा संशोधित की गई यह नई दर शनिवार से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू मानी जाएगी, जिससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

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बाजार को संतुलित रखने के लिए सरकार का बड़ा कदम

खाद्य मंत्रालय का मानना है कि इस कदम से खुले बाजार में प्याज के दामों को संतुलित रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही देश के तमाम उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को उनकी मेहनत और उपज का पहले से कहीं बेहतर मूल्य आसानी से मिल सकेगा।

देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र के किसानों ने हालांकि राज्य में खेती की लगातार बढ़ती ऊंची लागत को देखते हुए 30 रुपए प्रति किलो की खरीद दर की मांग की थी। किसानों का कहना था कि कम दाम से लागत नहीं निकलती।

इस साल दो लाख टन प्याज खरीदेगी केंद्र सरकार

घरेलू बाजार में जरूरी दखल देने के मकसद से ‘मूल्य स्थिरीकरण कोष’ यानी पीएसएफ के तहत हर साल प्याज का एक बड़ा बफर स्टॉक बनाया जाता है। केंद्र सरकार ने इस चालू साल के लिए कुल दो लाख टन प्याज खरीद का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है।

यह खरीद लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में की गई तीन लाख टन की कुल सरकारी खरीद के मुकाबले थोड़ा कम है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की है।

केंद्रीय मंत्री जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि मंडी कीमतों और भंडारण-योग्य प्याज की गुणवत्ता को देखते हुए ‘न्यूनतम सुनिश्चित खरीद कीमत’ (एमएपीपी) को 13 जून 2026 से संशोधित कर अब 1,650 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

फसल वर्ष 2025-26 में उत्पादन घटने का अनुमान

नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले फसल वर्ष 2024-25 में हुए 307.67 लाख टन की तुलना में चालू फसल वर्ष 2025-26 में देश के भीतर प्याज का कुल उत्पादन मामूली गिरावट के साथ करीब 307.37 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है।

महाराष्ट्र के किसान संगठन लगातार 3,000 रुपए प्रति क्विंटल की न्यूनतम खरीद कीमत की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) की ओर से दी जा रही पुरानी दरें बाजार की उम्मीदों और खेती की लागत से बेहद कम थीं।

Author: Rajesh Kumar

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