Birth Death Registration: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव, 2 साल की देरी पर कोर्ट से मिलेगी मंजूरी

New Delhi News: केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कानून में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति दो साल के भीतर जन्म या मृत्यु की जानकारी नहीं देता है, तो उसे रजिस्ट्रेशन के लिए ज्यादा कठिन कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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प्रस्ताव के तहत दो साल के बाद होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए फर्स्ट-क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। यह नया नियम पुराने कानून की जगह लेगा। पुराने नियम में ऐसे मामलों को जिला मजिस्ट्रेट (DM), एसडीएम या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मंजूरी दे सकते थे।

नियमों को सख्त करने के लिए कैबिनेट के सामने रखा प्रस्ताव

गृह मंत्रालय ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन का यह अहम प्रस्ताव बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट के सामने पेश किया। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य देर से होने वाले पंजीकरण की व्यवस्था को बेहद सख्त और पारदर्शी बनाना है।

सरकार चाहती है कि देश में जन्म और मृत्यु का डेटा लगभग रियल-टाइम में दर्ज हो। यह डेटा सटीक नीतियां बनाने और सरकारी कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए बहुत जरूरी है। इस कड़े कदम से फर्जी कागजात और रिकॉर्ड के गलत इस्तेमाल पर भी रोक लगेगी।

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जानिए डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के नए नियम

मौजूदा समय में हर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के माध्यम से 21 दिनों के भीतर कराना होता है। यह जानकारी स्थानीय रजिस्ट्रार को देनी होती है। यदि कोई 30 दिनों के बाद और एक साल के भीतर सूचना देता है, तो प्रक्रिया बदल जाती है।

ऐसे मामलों में डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति, निर्धारित फीस और स्व-प्रमाणित दस्तावेज की आवश्यकता होती है। कानून की धारा 13(3) के तहत एक साल से अधिक की देरी पर अभी तक डीएम या एसडीएम से मंजूरी मिलती थी, जो अब दो साल की देरी तक ही सीमित रहेगी।

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