Prayagraj News: शहर के मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय, जिसे काल्विन अस्पताल के नाम से भी जाना जाता है, में चिकित्सा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता बेहद कम होने के कारण मरीजों को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर हमेशा खतरा बना रहता है।
मरीजों को सिलेंडर का लेना पड़ रहा सहारा
अस्पताल के 230 बेड में से केवल 10 बेड पर ही सेंट्रल ऑक्सीजन की सप्लाई हो पा रही है। इसमें छह बेड इमरजेंसी और चार बेड आईसीयू के हैं। बाकी मरीजों को आपात स्थिति में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलेंडरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह समस्या काफी समय से बनी हुई है, जिससे मरीजों को भारी असुविधा हो रही है।
प्लांट की कम क्षमता बनी बड़ी बाधा
कुंभ 2019 के दौरान स्थापित इस प्लांट में 1,000 एलपीएम की जगह मात्र 300 एलपीएम का ही ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसी कारण सभी बेड तक ऑक्सीजन की पाइपलाइन तो बिछी है, लेकिन सप्लाई नहीं पहुंच पाती। कोरोना की दूसरी लहर के समय भी अस्पताल प्रशासन को मरीजों की जान बचाने के लिए इस कमी के कारण भारी संघर्ष करना पड़ा था।
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई और समाधान
ऑक्सीजन की कमी के कारण अस्पताल के 32 बेड वाले इमरजेंसी वार्ड को घटाकर छह बेड का कर दिया गया है। अस्पताल के डॉक्टर एसके का कहना है कि उन्होंने प्लांट की क्षमता 300 से बढ़ाकर 1,000 एलपीएम करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का स्थाई समाधान निकल आएगा और मरीजों को राहत मिलेगी।
फिलहाल सिस्टर इंचार्ज के पास आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त कंसंट्रेटर और सिलेंडर की व्यवस्था रखी गई है। डॉक्टर का दावा है कि मरीजों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जा रही है। हालांकि, अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लेना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

