भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद: 21 राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

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India News: देश के अधिकांश हिस्सों में जारी भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। विभाग ने आज 21 राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और आंधी का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।

इस मौसमी बदलाव के चलते तापमान में 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लंबे समय से गर्मी की मार झेल रहे आम जनजीवन को काफी राहत मिलेगी। हालांकि, विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की विशेष सलाह दी है।

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भारी बारिश और आंधी की चेतावनी वाले प्रमुख राज्य

मौसम विभाग के अलर्ट में शामिल राज्यों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश प्रमुख हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, महाराष्ट्र, असम, त्रिपुरा, नागालैंड, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी अत्यधिक भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

आईएमडी ने किसानों, यात्रियों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभों के गिरने और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश फसलों के लिए फायदेमंद होगी, लेकिन जलभराव से कुछ क्षेत्रों में नुकसान भी हो सकता है।

केरल में मानसून की सुस्त रफ्तार का असर

दूसरी ओर, देश में मानसून की चाल पर चिंता बढ़ती जा रही है। केरल में इस सीजन में अब तक सामान्य से 33 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे अधिक प्रभावित वायनाड जिला है, जहां 64 प्रतिशत बारिश की कमी देखी गई है। तिरुअनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा और त्रिशूर जैसे चुनिंदा जिलों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति अभी सामान्य नहीं है।

मौसम विज्ञान विभाग की निदेशक वीके मिनी के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में वर्षा में सुधार नहीं होता है, तो अधिक जिले कम बारिश वाली श्रेणी में आ सकते हैं। मौसम विभाग के मानदंडों के मुताबिक, 19 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी को ‘कम बारिश’ की श्रेणी में रखा जाता है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें मानसून की सक्रियता पर टिकी हैं।

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