प्रयागराज में तीन हजार से अधिक कोचिंग सेंटर अवैध, प्रशासन की सख्ती के बावजूद नियमों की हो रही अनदेखी

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Prayagraj News: लखनऊ की घटना के बाद प्रयागराज प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहर में वैध कोचिंग सेंटरों की संख्या बहुत कम है, जबकि हजारों संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। ये कोचिंग सेंटर तंग गलियों से लेकर पॉश इलाकों तक फैले हुए हैं, जो छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हैं।

बेसमेंट और असुरक्षित कमरों में चल रही पढ़ाई

अधिकांश अवैध कोचिंग सेंटर नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट का इस्तेमाल क्लासरूम के रूप में कर रहे हैं। यहां प्रवेश और निकास के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। कटरा, अल्लापुर, सलोरी और छोटा बघाड़ा जैसे इलाकों में तीन कमरों के छोटे परिसरों में कोचिंग चल रही है, जहां कोई भी सुरक्षा मानक लागू नहीं है।

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कागजों पर सिमटा रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा

आंकड़ों के अनुसार, नगर निगम में केवल 144 और डीआईओएस कार्यालय में मात्र 93 संस्थान ही वैध रूप से पंजीकृत हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि पूरे शहर में करीब 3,000 कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। बिना मानक पूरा किए ये संस्थान धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य और सुरक्षा दोनों ही जोखिम में हैं।

बिना रजिस्ट्रेशन पकड़े जाने पर भारी जुर्माना

नियमों के तहत, रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर पहली बार में 25 हजार रुपये का जुर्माना तय है। यदि दोबारा बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलते हुए पकड़े जाते हैं, तो जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपये हो जाता है। विभाग के अधिकारी समय-समय पर जांच का दावा करते हैं, लेकिन अवैध संस्थानों की संख्या पर अभी तक कोई ठोस लगाम नहीं लग सकी है।

कोचिंग सेंटर रजिस्ट्रेशन के अनिवार्य मानक

कोचिंग संस्थानों के लिए तय पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रजिस्ट्रेशन के लिए नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है:

  • डीआईओएस कार्यालय और नगर निगम से पंजीकरण अनिवार्य है।
  • संस्थान का रजिस्ट्रार कार्यालय में बिजनेस के रूप में पंजीकरण कराएं।
  • फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी लेना बेहद जरूरी है।
  • नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • आवेदन में कमरों का आकार, बैठने की क्षमता और शिक्षकों की योग्यता का ब्योरा दें।
  • संचालक का पहचान पत्र, बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज संलग्न करें।

अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से संचालित संस्थानों की पहचान कर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन अब इन सेंटरों की गहन जांच कर रहा है। सभी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें और सुरक्षा मानकों को अपनाएं।

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