New Delhi: स्टेनलेस स्टील क्षेत्र के 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) को फिर से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदेश हटाए जाने के बाद चीन से आयात में तेज वृद्धि हुई है।
गुणवत्ता नियंत्रण आदेश स्थगित होने से घरेलू बाजार पर बढ़ा दबाव
इस्पात मंत्रालय ने 27 अप्रैल को एक आदेश के जरिए विभिन्न स्टेनलेस स्टील उत्पादों के लिए केवल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित वस्तुओं के उपयोग को अनिवार्य बनाने वाले क्यूसीओ को स्थगित कर दिया था। यह कदम एमएसएमई इकाइयों पर अनुपालन बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
स्टेनलेस स्टील उद्योग के एमएसएमई ने हालांकि, आदेश स्थगित होने के बाद स्टेनलेस स्टील उत्पादों के आयात में आई तेज वृद्धि पर गहरी चिंता जताई है। उद्योग संगठनों का कहना है कि क्यूसीओ के स्थगन से चीन से कम कीमत वाले माल का रास्ता पूरी तरह खुल गया है।
स्टेनलेस स्टील इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन और री-रोलर्स एसोसिएशन ने इस्पात मंत्रालय को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू एमएसएमई विनिर्माताओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। बाजार में इस असंतुलन से हजारों नौकरियों और भारतीय उद्यमियों द्वारा किए गए बड़े निवेश पर खतरा मंडरा रहा है।
आयात के आंकड़ों में भारी उछाल और मेक इन इंडिया पर असर
संगठनों ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अप्रैल 2026 में स्टेनलेस स्टील का आयात 1,01,252 मीट्रिक टन रहा। यह एक वर्ष पहले के इसी महीने के 61,143 मीट्रिक टन की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक है। मार्च 2026 के मुकाबले अप्रैल में आयात 69 प्रतिशत बढ़ा है।
चीनी स्टेनलेस स्टील उत्पाद बेहद कम कीमतों पर भारतीय बाजार में आ रहे हैं, जिससे घरेलू विनिर्माताओं के लिए असमान प्रतिस्पर्धी माहौल बन रहा है। भारतीय कंपनियां सख्त गुणवत्ता मानकों और पर्यावरणीय नियमों का पालन करती हैं, जबकि आयातित उत्पाद इन पैमानों पर खरे नहीं उतरते।
एसोसिएशन के सदस्यों के अनुसार, ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर भरोसा करते हुए अनेक एमएसएमई इकाइयों ने क्षमता विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन में भारी निवेश किया है। यदि सरकार ने इस बढ़ते आयात को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाएगा।

