Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में हिमकेयर कार्ड की सुविधा बंद होने से स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। इस वजह से दूर-दराज से आने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन द्वारा कार्ड स्वीकार न करने के कारण कई मरीज बिना इलाज कराए ही अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ गंभीर रूप से बीमार लोगों को मजबूरी में अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे उनका घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
परेशान मरीजों को मजबूरी में लेना पड़ रहा कर्ज
जोगिंद्रनगर से अपने भाई का इलाज करवाने टांडा अस्पताल पहुंची रजनी देवी ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुफ्त इलाज की उम्मीद में ही हिमकेयर कार्ड बनवाया था। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर उन्हें पता चला कि सरकारी काउंटर पर इसकी सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
इस अव्यवस्था के कारण अब तक रजनी देवी के 10 से 15,000 रुपये अतिरिक्त खर्च हो चुके हैं। इसी तरह चम्बा से आए मरीज धर्म चंद ने बताया कि वह एक लंबा सफर तय करके अस्पताल पहुंचे थे। कार्ड न चलने के कारण उन्हें रिश्तेदारों से उधार पैसे लेकर इलाज शुरू करवाना पड़ा।
ऑपरेशन और महंगी जांचों के लिए भारी आर्थिक बोझ
कांगड़ा निवासी शम्मी शर्मा ने बताया कि उन्होंने ऑपरेशन के लिए अस्पताल में अपना हिमकेयर कार्ड दिया था। सुविधा नहीं मिलने से उन्हें निजी स्तर पर करीब 20,000 रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने मांग की है कि जब सरकार ने कार्ड बनाया है, तो मरीजों को इसका पूरा लाभ मिलना चाहिए।
चम्बा से आई सुमन देवी ने बताया कि उनकी सास के बड़े ऑपरेशन के दौरान कार्ड होने के बावजूद 15 से 20,000 रुपये खर्च हो गए। शाहपुर के अमर सिंह को एमआरआई सहित अन्य जरूरी टेस्टों के लिए कर्ज लेना पड़ा। सभी मरीजों ने सरकार से इस जनहित योजना को तुरंत बहाल करने की गुहार लगाई है।

