Una News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में डॉक्टरों की एक टीम ने बड़ा कमाल किया है। उन्होंने एक नौ महीने की गर्भवती भैंस का सफल ऑपरेशन करके उसकी जान बचाई है। लालरी स्थित पॉलीक्लिनिक में डॉक्टरों ने भैंस के पेट से 66 नुकीले धातु के टुकड़े बाहर निकाले हैं।
हरोली उपमंडल के बरेवाल गांव के रहने वाले पशुपालक करनैल सिंह अपनी भैंस को लेकर परेशान थे। उनकी नौ महीने की गर्भवती भैंस पिछले 10 दिनों से चारा नहीं खा पा रही थी। वह काफी सुस्त और बीमार लग रही थी, जिसके बाद वह उसे पॉलीक्लिनिक लेकर पहुंचे।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा और डॉक्टरों ने की सर्जरी
पॉलीक्लिनिक में तैनात डॉक्टर निशांत रनौत ने बीमार भैंस की गहन जांच की। जब डॉक्टर ने भैंस के खून की जांच और अल्ट्रासाउंड करवाया, तो सब हैरान रह गए। भैंस के पेट में धातु की कई चीजें मौजूद थीं। इसके बाद डॉक्टर ने तुरंत सर्जरी का फैसला लिया।
डॉ. निशांत रनौत, डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा रनौत और डॉ. स्टेफनी प्रधान की टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने बहुत ही सावधानी से सफलता पूर्वक ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस दौरान भैंस के पेट से कई कील, तार और धातु के छोटे टुकड़े निकले।
समय पर इलाज मिलने से बची भैंस की जान
डॉ. निशांत ने बताया कि सफल ऑपरेशन के बाद भैंस के स्वास्थ्य में अब लगातार सुधार हो रहा है। उसे असहनीय दर्द से भी काफी राहत मिली है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय रहते यह ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो भैंस की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।
ये नुकीली धातु की वस्तुएं भैंस के पेट के अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती थीं। डॉ. निशांत रनौत ने सभी पशुपालकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पशुओं को सूखा चारा खिलाने से पहले उसे अच्छी तरह से जरूर छान लें।
पशुपालकों के लिए डॉक्टरों ने जारी की जरूरी सलाह
डॉक्टरों के मुताबिक, गेहूं के भूसे और अन्य सूखे चारे को छानने से उसमें मौजूद कील या तार अलग हो जाते हैं। ऐसा करने से ये नुकीले टुकड़े पशुओं के पेट में नहीं पहुंच पाते हैं। थोड़ी सी सावधानी रखकर पशुओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।

